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हाईकोर्ट की रोक से मिली कॉलेजों को राहत

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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गढ़वाल विश्वविद्यालय के संबद्ध कॉलेजों में वर्ष 2009 के बाद बढ़ी हुई सीटों और कोर्सेज में दाखिले पर रोक के आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे मिलने के बाद कॉलेजों को राहत मिली है। हाईकोर्ट ने गढ़वाल विवि को अवमानना का नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। अब गढ़वाल विवि जवाब तैयार करने में जुटा हुआ है।
गढ़वाल विवि के कुलसचिव डॉ एके झा की ओर से हाल ही में एक आदेश जारी किया गया था। इसमें कहा गया था कि नियम के हिसाब से अगर कोई भी संबद्ध कॉलेज वर्ष 2009 के बाद बढ़ी हुई सीटों या कोर्सेज में दाखिला लेता है तो इसके लिए विवि जिम्मेदार नहीं होगा। विवि ऐसे छात्रों की परीक्षाएं भी नहीं कराएगा। चूंकि यह मामला पहले से ही हाईकोर्ट में लंबित था, इसलिए मंगलवार को हाईकोर्ट ने गढ़वाल विवि के इस आदेश पर रोक लगाते हुए विवि कुलपति को अवमानना का नोटिस जारी कर दिया था। इसके साथ ही कॉलेजों को फिलहाल दाखिलों में राहत मिल गई है। विवि प्रशासन का कहना है कि दाखिलों को लेकर फिलहाल वह अपना जवाब तैयार करने में जुटे हुए हैं। कॉलेजों का तर्क है कि चूंकि हाईकोर्ट रोक लगा चुका है, इसलिए दाखिले लिए जा रहे हैं। मामले में एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट के सचिव जीडीएस वार्ने का कहना है कि हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद विवि को इस तरह के आदेश से बचना चाहिए। कॉलेज और विवि एक साथ मिलकर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम करें तो बेहतर होगा। उनका यह भी कहना है कि नियम के हिसाब से सेंट्रल यूनिवर्सिटी एक्ट में बदलाव कर सभी कॉलेजों को असंबद्ध किया जा सकता है तो वह सरकार और न्यायालय के हर आदेश का अनुपालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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2009 के बाद क्यों बढ़ाई सीटें
पूरे प्रकरण में एक सवाल यह भी उठ रहा है कि जब नियम के हिसाब से सीटें या कोर्स नहीं बढ़ाई जा सकती थी तो विवि ने वर्ष 2009 के बाद से आज तक किस आधार पर सीटें और कोर्स बढ़ाए। इससे विवि प्रशासन के पूर्व के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं।
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अभी दाखिलों को लेकर कुछ भी कहना नहीं चाहूंगा। हाईकोर्ट ने विवि से जवाब मांगा है। हम अपना जवाब तैयार कर रहे हैं। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-डॉ. एके झा, कुलसचिव, गढ़वाल विवि
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