ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
माह-ए-रमजान के मुकद्दस सफर में रहमत का अव्वल असरा शनिवार को खत्म हो गया। दस रोज के इस असरे में खुदा ने अपने बंदों के लिए तमाम रहमत और बरकतें अता फरमाईं। आज से दूसरा असरा मगफिरत यानी (माफी) का शुरू हो गया। उलमा ने बताया कि इस असरे में अल्लाह गुनाहों से तौबा करने पर उनको माफ कर देते हैं।
शहर मुफ्ती सलीम अहमद बताया कि माह-ए रमजानुल मुबारक को तीन असरों में बांटा गया है। हर असरा दस रोज का होता है। पहला असरा रहमत का है। लिहाजा इसमें अल्लाह तआला अपने नेक रोजदार बंदों के लिए तमाम रहमत व बरकत अता करता है। दूसरा असरा मगफिरत का है। इसमें गुनाहों से तौबा करने वालों को माफी मिलती है। खुदा की इबादत करने, नेक रास्ते पर चलने वाले के तमाम गुनाहों को बख्श दिया जाता है। लिहाजा माह-ए रमजान शरीफ का हर रोज खुदा की इबादत और कुरआन-ए-पाक की तिलावत में गुजारें। खुदा इस माह में बरकत, माफी और जन्नत अता फरमाएगा। कहा कि रमजान शरीफ के हर लम्हे को इबादत में बिताना चाहिए।
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फोन घुमाएं, मुफ्त पाएं कंजुल ईमान
नायब सुन्नी शहर काजी सैयद अशरफ हुसैन कादरी ने बताया कि रमजान का महीना कुरान के नाजिल होने का महीना है। जो हजरात कुरान को समझ कर पढ़ना चाहते हैं, ऐसे लोगों को इमाम अहमद रजा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से कुरान का तर्जुमा कंजुल ईमान निशुल्क दिया जा रहा है। जो व्यक्ति कजुल ईमान मुफ्त लेना चाहता है, वह मोबाइल नं. 7055478786 पर संपर्क करें।
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कई जगह खत्म हुई तरावीह
शुक्रवार की रात शहर में कई प्रतिष्ठानों पर आयोजित दस दिन की तरावीह खत्म हुई। इस दौरान उलमा ने तकरीर कर तरावीह और कुरान की फजीलतें बयां की। वही, दुनिया में अमन-चैन की दुआ कराई गई। लोगों ने कुरान सुनने और सुनाने वालों को इनामात से नवाजा। शहर मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने बताया कि मुकद्दस रमजान में तरावीह जरूरी है। प्रतिष्ठानों पर तरावीह भले ही पूरी हो गई हो, लेकिन मस्जिदों में तरावीह ईद का चांद दिखाई देने तक चलेगी। लिहाजा लोग मुस्तकिल तरावीह पढ़ें।
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रोजा वक्त
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ग्यारहवां रोजा इफ्तार
27 मई 2018
सुन्नी -7:14 बजे
शिया-7: 21 बजे
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28 मई 2018
बारहवां रोजा सहरी
सुन्नी - 3:43 बजे
शिया- 3:34 बजे