जनपद हरिद्वार में प्राथमिक शिक्षकों का बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है। बीटीसी की मार्कशीट और मूल निवास प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर 12 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है।
बार-बार मांगने पर भी अपने सर्टिफिकेट न देने वाले आठ शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। जबकि पोल खुलने के डर से साल भर पहले लिया गया एक शिक्षक का वीआरएस भी निरस्त किया गया है। कार्रवाई की जद में आए सभी शिक्षक वर्ष 1992 से 2002 के बीच भर्ती हुए थे। इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा पकड़ में आने से विभाग और शिक्षकों में हड़कंप मचा है। फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी करने पर शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है।
हरिद्वार मेें अलग-अलग ब्लॉक के स्कूलों में तैनात 35 प्राइमरी शिक्षकों के संबंध में कई साल से सूचना के अधिकार के तहत विभाग से जानकारियां मांगी जा रही थी। शासन स्तर पर भी इनकी शिकायतें की गई थी। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक रामेंद्र कुशवाहा ने पिछले साल चार्ज संभालने के बाद आला अधिकारियों के निर्देश पर शिक्षकों की जांच शुरू की।
संदेह के दायरे में आए सभी शिक्षकों से उनके सर्टिफिकेट मांगे गए। बार-बार नोटिस के बाद कुछ शिक्षकों ने अपने दस्तावेज विभाग को उपलब्ध कराए। जांच में 11 शिक्षक शिक्षिकाओं की बीटीसी की मार्कशीट और एक शिक्षिका का मूल निवास प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। बार बार नोटिस देने के बावजूद सर्टिफिकेट जांच के लिए उपलब्ध न कराने वाले आठ शिक्षकों को सस्पेंड भी किया गया है।