ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
नई कंपनी में समायोजित करने की मांग को आंदोलन कर रहे आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा के पूर्व कर्मचारियों ने रविवार को मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखा। कर्मचारियों ने कहा यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक संज्ञान नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। वहीं रविवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनै ने भी कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दिया।
बता दें, आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन का जिम्मा जीवीके से हटाकर कैंप कंपनी को दे दिया गया है। इससे पहले जीवीके की ओर से अपने कर्मचारियों को मार्च में ही नोटिस दे दिया गया था। इसके बाद से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। हालांकि, कुछ कर्मचारियों ने नई कंपनी को स्वत: ही ज्वाइन कर लिया था, लेकिन, 717 कर्मचारी इस मांग पर अड़े हैं कि उन्हें जो वेतन पहले मिलता था उसी के आधार पर उन्हें नई कंपनी में समायोजित किया जाए। इसके लिए उन्होंने एक बार मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की थी। हालांकि, जब इस मुलाकात में कोई निर्णय नहीं हुआ तो उन्होंने आंदोलन शुरू कर दिया। गत 27 अप्रैल को उन्होंने अपनी अपने सेवाएं छोड़कर 30 अप्रैल से आंदोलन शुरू करने की योजना बनाई थी। इसी योजना के अंतर्गत वे नियत तिथि पर परेड ग्राउंड के पास धरने पर बैठ गए। इसी क्रम में तीन दिन पहले भीख मांगकर भी प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था। बहरहाल सरकार की ओर से नहीं कोई फैसला नहीं लिया गया है। रविावर को सभी कर्मचारियों ने अपने अपने खून से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। कर्मचारियों का कहना था कि यह उनके आंदोलन की शुरुआत है। यदि सरकार ने कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया तो उग्र आंदोलन करेंगे। पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनै ने कहा कि आंदोलन का मुख्य कारण सरकार का अड़ियल रवैया है। सरकार को जल्द से जल्द कर्मचारियों के हक में फैसला लेना चाहिए।