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डॉक्टरों ने किया प्रस्तावित नर्सिंगहोम एक्ट का विरोध

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डॉक्टरों ने किया प्रस्तावित नर्सिंगहोम एक्ट का विरोध
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से स्वास्थ्य सचिव को सौंपे गए प्रस्तावित उत्तराखंड नर्सिंगहोम एक्ट के मसौदे का डॉक्टरों का नए सिरे से विरोध कर दिया है। आईएमए की ओर से आयोजित 17वें वार्षिक अधिवेशन के दौरान बैठक में मांग उठाई कि प्रस्तावित उत्तराखंड एक्ट मेें संशोधन किया जाए। बैठक के दौरान चर्चा हुई कि 50 बेड से कम संख्या वाले अस्पतालोें को पंजीकरण से छूट देने के साथ ही अन्य छूट दी जाएं।
राज्य स्तरीय बैठक में सहमति बनी कि सचिव स्वास्थ्य के साथ होने वाली बैठक में आईएमए के सभी 24 यूनिट से दो-दो डॉक्टरों को भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया जाए। सचिव स्वास्थ्य से वार्ता करने वाली कमेटी में सभी विधाओं के चिकित्सकोें को शामिल किया जाए। बैठक के दौरान सहमति बनी कि हरियाणा व दिल्ली की तर्ज पर एक्ट को लागू किया जाय। यदि सरकार व शासन स्तर पर क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट को जबरदस्ती लागू कराने की कोशिश करें तो इसका विरोध किया जाए।
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बैठक में आईएमए एक्ट में बदलाव की भी मांग उठी। निर्णय लिया गया कि आईएमए की राज्य स्तरीय बैठकों का आयोजन देहरादून के अलावा हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर, कोटद्वार, हल्द्वानी, नैनीताल, रुद्रप्रयाग समेत अन्य शहरों में भी होना चाहिए। बैठक में आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. डीडी चौधरी, आईएमए उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बीएस जज, आईएमए देहरादून के अध्यक्ष डॉ. सुमन सेठी, सचिव डॉ. जयराज हंसपाल, उत्तराकॉन-2018 के चेयरमैन डॉ. कृष्ण अवतार, सचिव डॉ. तरुण मित्तल, डॉ. दिनेश सिंह सहित आईएमए के पदाधिकारी व डॉक्टर उपस्थित थे।
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