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अफसर नहीं ठेकेदार चला रहे एडीबी : खजान दास

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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राजपुर रोड क्षेत्र से भाजपा विधायक खजान दास ने अपने विधानसभा क्षेत्र में हो रहे सौंदर्यीकरण पर ही सवाल खड़े किए हैं। विधायक ने एडीबी अफसरों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने गली मोहल्लों की सड़कों की खुदाई के बाद अब राजपुर रोड सौंदर्यीकरण में घोटाले का आरोप लगाते हुए प्रोजेक्ट की फाइलें तलब की हैं। बहरहाल सौंदर्यीकरण का प्रोजेक्ट पूरा होने की कगार पर है।
विधायक खजान दास का आरोप है कि एडीबी के अफसर बेलगाम हो गए हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। एडीबी मनमर्जी से जहां तहां सड़कें खोद रहा है और लोग परेशान हैं। इसके अलावा विधायक ने एडीबी की कार्यशैली पर ही सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि एडीबी मैकेनिकल इंजीनियरों से सिविल कार्य करा रहा है। ऐसे में मैकेनिकल इंजीनियरों को सिविल कार्य का अनुभव नहीं होने के कारण ठेकेदार एडीबी को चला रहे हैं। विधायक ने राजपुर रोड के सौंदर्यीकरण को लेकर भी एडीबी को निशाने पर लिया है। विधायक का कहना है कि सरकार डेढ़ सौ करोड़ कर्ज लेकर शहर का सौंदर्यीकरण करा रही है। इसमें 17 करोड़ का प्रोजेक्ट सिर्फ राजपुर रोड के सौंदर्यीकरण का है। ऐसे में एडीबी के अफसर कर्ज के रुपये सिर्फ डकराने में लगे हैं। विधायक ने सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट के अलावा एडीबी के सभी कार्यों की रिपोर्ट तलब की है। इसके लिए नौ जनवरी तक समय दिया है। विधायक ने कहा कि 10 जनवरी को वे खुद समीक्षा करेंगे। सौंदर्यीकरण, सीवर एवं पेयजल लाइनों में गड़बड़ी करने वाले अफसरों को किसी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। बहरहाल विधायक की नाराजगी से एडीबी के अफसरों में खलबली है। अफसर हर प्रोजेक्ट की फाइल अपडेट करने में जुटे हैं।
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सरकार की प्राथमिकता में है राजपुर रोड: राजपुर रोड वीआईपी क्षेत्र में है। इसी रोड पर महामहिम राष्ट्रपति का आशियाना और कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान एवं कार्यालय हैं। मसूरी को जोड़ने वाली इसी सड़क से पर्यटक भी आवाजाही करते हैं। इस लिहाज से भी राजपुर रोड का सौंदर्यीकरण प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है।
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राजपुर रोड के सौंदर्यीकरण का प्रोजेक्ट 2015 से स्वीकृत है। सितंबर 2016 से इस पर काम शुरू हुआ था। इसके तहत फव्वारा चौक से दिलराम चौक तक सौंदर्यीकरण किया गया है। राष्ट्रपति आशियाना के एक किमी क्षेत्र में सड़क के दोनों तरफ सौंदर्यीकरण हो चुका है। प्रोजेक्ट में 70 फीसदी बजट एडीबी ने ही सरकार को कर्ज दिया है। 17 करोड़ के प्रोजेक्ट में उसी हिसाब से खर्च किया गया है। एडीबी में डेपुटेशन पर इंजीनियर तैनात हैं। वरिष्ठता के आधार पर ऐसे ही इंजीनियरों को प्रोजेक्ट सौंपे जाते हैं। बजट और कार्य की क्वालिटी में कहीं गड़बड़ी हुई है तो सरकार इसकी जांच करा सकती है।
- झरना कमठान, अपर निदेशक, एडीबी
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