कहा-प्रमाणपत्र बनाने वाले चिकित्सक भी आएंगे जांच के दायरे में
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। शिक्षा मंत्री डॉ़ धन सिंह रावत ने कहा, दिव्यांगता के फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर नौकरी पाने वाले शत प्रतिशत शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। प्रमाणपत्र बनाने वाले चिकित्सक भी जांच के दायरे में आएंगे।
एससीईआरटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने कहा, वर्ष 2022 में छह हजार शिक्षकों ने बीमारी के आधार पर तबादलों के लिए विभाग में आवेदन किया था। उन्होंने इस मामले में मेडिकल बोर्ड गठित कर शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच कराई तो पांच हजार शिक्षकों ने अपने प्रमाणपत्र वापस ले लिए। इस जांच से पता चला कि कई शिक्षकों ने दिव्यांगता के गलत प्रमाण पत्र बनाए हैं। इस तरह के शिक्षकों की संख्या करीब 51 है।
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सबको पता है तब किसकी सरकार थी
शिक्षा मंत्री डॉ़ धन सिंह रावत ने कहा, शिक्षक के छेड़खानी के आरोप के मामले में विपक्ष की ओर से कहा गया कि नगीना धामपुर के शिक्षक का गलत प्रमाणपत्र बनाकर उसे उत्तराखंड में नियुक्ति दी गई है, लेकिन इस शिक्षक की नियुक्ति 2015 में हुई है। सबको पता है तब प्रदेश में किसकी सरकार थी। शिक्षा मंत्री ने कहा, शिक्षको के दिव्यांगता प्रमाणपत्र मामले में भी उन पर आरोप लगाए गए कि स्वास्थ्य मंत्री रहते उन्होंने एक तरफ प्रमाणपत्र बनाए वहीं, दूसरी तरफ शिक्षा विभाग में नियुक्तियां दी। इन शिक्षकों की नियुक्तियां 1991 से 2016 तक हुई है।