कामकाजी महिलाएं देहरादून समेत उत्तराखंड में शाम छह नहीं बल्कि रात दस बजे तक काम कर सकती हैं। हालांकि सामान्य तौर पर ड्यूटी का समय शाम सात बजे तक का रहेगा। इसके बाद महिला कर्मियों से काम लेने पर उन्हें घर तक छुड़वाने की जिम्मेदारी संबंधित प्रतिष्ठान मालिक की होगी। शासन ने सेंट्रल लेबर एक्ट के आधार पर अगले तीन साल के लिए गाइडलाइन जारी की है।
शासनादेश के मुताबिक कारखानों में काम करने वाली महिला कर्मचारी की दैनिक ड्यूटी शाम सात बजे तक होगी। यदि इसके बाद काम कराया जाता है तो कारखाना मालिक की जिम्मेदारी होगी कि वह महिला को सुरक्षित उसके घर तक पहुंचाए। पर किसी भी परिस्थिति में रात दस बजे के बाद महिला कर्मचारी से कारखाने या अन्य किसी वाणिज्यिक प्रतिष्ठान में काम नहीं लिया जाएगा।
सिडकुल के एमडी और जिलाधिकारियों के माध्यम से औद्योगिक इकाइयों को भेजे गए ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इसे लागू करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को यह खबर आई थी कि बाजार, दुकान, होटल, रेस्तरां और अन्य निजी प्रतिष्ठानों में महिलाएं शाम छह बजे के बाद काम नहीं कर सकेंगी।
प्रमुख सचिव गृह विनिता कुमार का कहना है कि शाम छह बजे के बाद महिलाओं के काम करने पर प्रतिबंध लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। यह काम श्रम विभाग का है। वैसे भी लेबर एक्ट में स्पष्ट व्याख्या है, इसलिए अलग से आदेश जारी करने की जरूरत नहीं है। लेकिन यौन उत्पीड़न समिति की अध्यक्ष होने के नाते मैं अलग से गाइडलाइन जारी करूंगी।
कुछ और निर्देश
-शाम सात बजे के बाद काम पर न आने पर नियोजक नौकरी से नहीं हटाएगा।
-किसी भी कार्य दिवस में नौ घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जाएगा।
- यह समय एक सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए।