ऊखीमठ के समीप पठाली गांव ज्योतिष रोड देखने में जितना सुंदर नजर आता है, उतना ही अभागा है। महा आपदा ने एक गांव के 11 लोगों की जिंदगी लील ली।
इनमें पांच युवक भी थे। इसी गांव में एक परिवार ऐसा भी है जहां अब कोई पुरुष नहीं रह गया। अकेली सास, उनकी दो पुत्र वधू और एक साल की बच्ची पूरी तरह असहाय हो गई।
पूरा गांव रो रहा
इस गांव में तबाही के बाद की वीरानी है। यहां के रास्ते से निकलते हुए राइफल मैन गीता तिवारी कहते हैं कि वहां कौन किस को समझाए, जहां पूरा गांव रो रहा है। छुट्टियों में केदारनाथ जाकर घूमने और कुछ रोजगार कमाने पांच साथी भी हमेशा केलिए विदा हो गए आप महसूस कर सकते है कि जहां विनाश में एक ही रात में 11 लोगों वली ले है।
राइफलमैन गीता प्रसाद तिवारी को अपनी ड्यूटी निभाने के लिए गुप्तकाशी जाना था। वह गांव से पैदल ही सफर के लिए निकल पड़ते हैं पर गांव के बाकी लोगों के लिए यह संभव नहीं। यहां से फिलहाल अगस्त्यमुनि या गुप्तकाशी पहुंचना आसान नहीं। सारे रास्ते खराब हैं। पठाली गांव केलोग केदारनाथ से जुड़े हुए थे।
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यात्रा सीजन में यहां के अधिकांश लोग केदारनाथ चले जाते हैं। वहां छोटे-मोटे कारोबार से लेकर घोड़ा, कंडी का काम करते थे। इससे गांव की आजीविका चल रहीं थी। इस आपदा ने सब खत्म कर दिया।
तेजस्वर सिंह और उनका छोटा बेटा इस महा आपदा में लापता हो गए हैं। अब उनके बचे होने की कोई उम्मीद नहीं कर रहा। विडंबना यह है कि इसी साल 14 अप्रैल को तेजेस्वर सिंह के बड़े बेटे की देवप्रयाग में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। परिवार उसके सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि फिर आपदा आ गई और सब तहस नहस हो गया।
वापस नहीं लौटे
तेजेस्वर सिंह के साथ उसके छोटे बेटे का भी पता नहीं है। घर पर उसकी डेढ़ साल की अबोध बच्ची टुकुर-टुकुर अपनी दादी और मां को देखती है। उसे नहीं पता कि घर में सब क्यों रो रहे हैं। ऐसे मातम उन घरों में भी पसरा है जहां बाकी 9 लोग अभी वापस नहीं लौटे है जिनमें युवाओं के लिए मां बाप बिलख रहे हैं।
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