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आपदा ने छीना आय का जरिया

Sat, 06 Jul 2013 02:58 PM IST
पौड़ी/ब्यूरो
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उत्तराखंड में आई दैवी आपदा ने पशुपालकों की कमर तोड़ दी है। आपदा ने कई पशुपालकों का आय का जरिया छीन लिया है। कई लोगों को पूरी तरह बेरोजगार बना दिया है। जिससे उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।
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दैवी आपदा से प्रदेश में पशुधन को काफी नुकसान हुआ है। आपदा की चपेट में आने से प्रदेश में 4979 मवेशियों की भी मौत हो गई है। जिसमें घोड़े, खच्चर, गाय, भैंस, बकरी, भेड़ सहित कई वे मवेशी हैं जिनसे लोगों की आजीविका जुड़ी हैं। कई लोगों का रोजगार इन पशुओं पर भी निर्भर है। ऐसे में इन पशुओं के आपदा के भेंट चढ़ने से कई लोगों का रोजगार छिन गया है।

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में पशुपालन लोगों की आय का प्रमुख जरिया है। कई लोग दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं। कई बकरी भेड़, घोड़ा, खच्चर पालकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। प्रदेश के रुद्रप्रयाग व चमोली जिले में घोडे़ व खच्चर कई लोगों के रोजगार का मुख्य जरिया हैं।
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बकरी और भेड़ पालन से जुड़ा है रोजगार
पिथौरागढ़ जिले के सीमांत क्षेत्रों के कई लोगों का रोजगार बकरी और भेड़ पालन से जुड़ा हुआ है। लेकिन प्रदेश में आई इस आपदा ने पशुपालन से जुड़े कई परिवारों को बूरी तरह झकझोर सा दिया है। पशुपालन विभाग के अनुसार आपदा की चपेट में आने से प्रदेश में 4979 पशुओं की मौत हो गई।

गढ़वाल मंडल में 2394 और कुमाऊं मंडल में 2585 पशु आपदा की भेंट चढ़े हैं। मृत मवेशियों की संख्या में इजाफा भी हो रहा है।

मरने वाले पशुओं की संख्या का ब्यौरा
पशु संख्या
गाय 230
भैंस 210
बैल 111
घोड़े व खच्चर 1166
बकरी भेड़ 352
अन्य पशु 210

रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिले में सर्वाधिक नुकसान
आपदा से प्रदेश में रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिले में पशुधन को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। पशुपालन विभाग के अनुसार आपदा की चपेट में आने से पिथौरागढ़ में 2093 पशुओं और रुद्रप्रयाग जिले में 1411 पशुओं की मौत हुई है।

इसके अलावा देहरादून में 102, टिहरी में 259, चमोली में 141, उत्तरकाशी में 358, पौड़ी में 86, हरिद्वार में 37, नैनीताल में 09, अल्मोड़ा 110, बागेश्वर में 355, चंपावत में 18 पशु आपदा की चपेट में आकर मरे हैं। विभाग के अनुसार आपदा की चपेट में आने से प्रदेश में पांच हजार से अधिक मुर्गियों की मौत हुई है।

दैवी आपदा की चपेट में आने से गढ़वाल मंडल में पशुधन को काफी नुकसान हुआ है। मंडल में आपदा से घोड़े और खच्चरों की मौतें ज्यादा हुई है। गाय और भैंस काफी मरे हैं। जिससे कई लोगों के रोजगार और परिवारों की आजीविका प्रभावित होना स्वाभाविक हैं। राजस्व विभाग द्वारा मृतक पशुओं का सत्यापन कर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाएगा।
- अशोक कुमार, अपर निदेशक पशुपालन गढ़वाल मंडल पौड़ी

कुमायूं मंडल में दैवीय आपदा से पशुधन को पिथौरागढ़ जिले में सर्वाधिक नुकसान हुआ है। बागेश्वर और अल्मोड़ा जिले में भी काफी पशुओं की मौत हुई है। मवेशियों के मरने से कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हो गई है।
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- डा. भरत चंद्र, अपर निदेशक पशुपालन कुमाऊं मंडल
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