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अतिक्रमण के कारण बारिश ने देहरादून में बरपाया कहर

Mon, 17 Jun 2013 06:02 PM IST
देहरादून/ ब्यूरो
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समय पर अगर जिला प्रशासन ने ध्यान देकर कार्रवाई की होती तो राजधानी में पानी की ‘गरज’ इतनी उग्र साबित नहीं होती। शहर में 48 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार हुई बारिश में उन्हीं क्षेत्रों में अपना प्रकोप दिखाया है जहां नदी, नालों और खालों किनारे अवैध कब्जे कर अनियोजित निर्माण खड़े किए गए थे।
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पानी की ‘गरज’ के बाद अब प्रशासन की इन इलाकों में रहने वाले लोगों को संभालने में ‘सांस’ फूल रही है। अतिक्रमणों से पेश आई परेशानियों का सामना इनके साथ ही अन्य लोगों को भी करना पड़ रहा है। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में रिस्पना, बिंदला, कैनाल, तमसा, टौंस, सुसवा और सौंग नदी बहतीं हैं। सभी नदियों किनारे बड़ी संख्या में अतिक्रमण किए गए हैं। इसके अलावा शहर में अन्य बड़े नाले कब्जे कर घेर लिए गए हैं। इससे पानी निकासी नहीं होने पर बाधा होती है।

रहता है राजनीतिक का रोड़ा
नदियों किनारे अतिक्रमण कर बसाए गए घरों में कार्रवाई करते वक्त बीच में राजनीतिक गतिविधियां रोड़ा बनती है। अगर प्रशासन की टीम कार्रवाई करने पहुंचती हो राजनीतिक दांव-पेच में नेता विरोध करने पहुंच जाते है। इतना ही नहीं चुनाव के समय पर तो नेता वोट मांगते वक्त इन अवैध बस्तियों को वैध करवाकर परिसीमन का भरोसा भी दिलाते हैं।
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नाले अंडर ग्राउंड
पिछले कुछ वर्षों तक ड्रेनेज सिस्टम में नाले और नालियां सड़क किनारे खुलीं होती थीं। बारिश होने पर आसानी से इनकी सफाई हो जाती थी और पानी भी तेज गति में बह जाता था। लेकिन इन्हें सड़कों और स्लैबों से ढकने के बाद स्थिति बुरी हो गई है। इससे नगर निगम को नालों की सफाई करने में परेशानी आती है।

अंडर-ग्राउंड नाले बार-बार चोक होते रहते हैं और जगह-जगह नाले अटने से इनका पानी सड़कों और घरों में घुसता है। प्रशासन अगर समय मलिन बस्तियों में उतरा होता तो हालात ऐसे न होते। एमडीडीए मलिन बस्तियों में अवैध निर्माण पर कार्रवाई न कर सके इसके लिए बाकायदा जीओ जारी करवा लिया था। इसमें राजीतिक छाप साफ नजर आई थी।
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किस नदी पर कहां है अतिक्रमण
रिस्पना: रिस्पनापुल और इससे नीचे मोथरोवाला तक अवैध अधिक्रमण हैं।
बिंदला: बिंदला पुल से ऊपर की तरफ बड़ी संख्या में और हरिद्वार बाईपास के पास भी अवैध बस्तियां बसीं हैं।
कैनाल: पुलिस आफिसर कालोनी से आगे गब्बर सिंह बस्ती का बड़ा हिस्सा नदी के अतिक्रमण से बसा हुआ है।
तमसा: कैंट एरिया, इसके पहले और इससे आगे नदीं पर अतिक्रमण कर बस्तियां बसीं हुई हैं। इससे नदी का पानी इधर उधर को भागता है।
सुसवा: मोथरोवाला, दोड़वाला, खट्टा पानी, दूधली, बुल्लावाला में बड़ी संख्या में अवैध तरीके से नदी में कच्चे मकान बने हैं।
सौंग: बापूग्राम, झबरावाला, डोईवाला के पास कई इलाकों में अतिक्रमण है।
टौंस: प्रेनगर क्षेत्र में इस नदी पर बड़ी संख्या में अतिक्रमण किए गए हैं। कई प्रशिक्षण संस्थानों ने भी नदी का एरिया कब्जाया हुआ है।
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