इंजीनियरिंग कोर्सेज के लिहाज से वक्त भारी उलटफेर वाला गुजर रहा है। कोर ब्रांचेज के समन्वय से तैयार की गई विस्तारित ब्रांचेज जितनी तेजी से ऊपर चढ़ीं, उतनी ही जल्दी इनका जमाना भी खत्म होने के कगार पर जा पहुंचा है। यही वजह है कि छात्रों के लिए तरस रही इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन (ईसी) और एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन (एईआई) समेत कुछ विस्तारित इंजीनियरिंग ब्रांच को प्रदेश के पांच कालेजों ने नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में सरेंडर कर दिया है।
पर कोर ब्रांच का जलवा कायम
विस्तारित नई ब्रांचेज को लेकर छात्रों का रुझान भले तेजी से घट रहा हो, लेकिन एवरग्रीन मानी जाने वाली कोर (मुख्य) ब्रांचेज में दाखिले का क्रेज अब भी कायम है। इंजीनियरिंग की इन मूल ब्रांचों में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रानिक्स, कंप्यूटर साइंस शामिल हैं।
इन कालेजों ने छोड़ी ब्रांच
जीआरडी राजपुर रोड, देहरादून: एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन (एईआई) और इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी)
एमआईईटी कुमाऊं: इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईसीई)
डीबीआईटी देहरादून: एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन( एईआई)
आम्रपाली इंस्टीट्यूट हल्द्वानी: इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन (ईआई)
शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून: आटोमोबाइल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग
घाटे से उबरने की कवायद
इंजीनियरिंग कालेज में बीटेक की एक ब्रांच चलाने में चार साल में एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च आता है। छात्रों की बेहद कम संख्या के चलते कालेज संचालकों को भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। गत वर्ष एक कालेज अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता हासिल करने के बावजूद अपने यहां कोर्स इसलिए शुरू नहीं कर सका कि उसे छात्र नहीं मिले। ऐसी स्थिति इस वर्ष भी कुछ कालेजों के सामने आ गई है।
ऐसे में घाटे से उबरने के लिए उन्होंने कोर्स बंद करने का फैसला किया है। कम छात्र संख्या और कोर्स संचालन में होने वाले अत्यधिक खर्च के चलते पांच कालेजों ने ब्रांच को सरेंडर किया है।
कुछ समय पूर्व कुछ कालेजों ने इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) ब्रांच छोड़ दी थी।
-डा. आशीष उनियाल, कुलसचिव, यूटीयू