अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम का ‘पीला हाथी’ शुक्रवार को भी आधा दर्जन इलाकों में गरजा। कई जगह छिटपुट विरोध भी हुआ तो कई जगह लोगों ने अपनी गलती खुद ही मान ली। पुलिस और नगर निगम की टीम के आगे सभी व्यापारी बैकफुट पर रहे। हालांकि टीम के आगे गुजरते ही फिर से फुटपाथ पहले जैसे हाल में आ गए।
शुक्रवार को नगर निगम के नेतृत्व में अभियान प्रिंस चौक से शुरू हुआ। यहां पर टीम के पहुंचते ही कई दुकानदारों ने बाहर रखा सामान समेट लिया। त्यागी रोड पर टीम ने फुटपाथ पर बने आधा दर्जन खोखे तोड़ डाले। वहीं कई होर्डिंग को भी हटाया। टीम त्यागी रोड से होते हुए रेस्ट कैंप पहुंची। यहां पर टीम ने फुटपाथ के ऊपर बनाई गई एक सीढ़ी को तोड़ डाला।
फुटपाथ पर अतिक्रमण किया था
टीम ने जैसे ही चंदरनगर की तरफ रुख किया, यहां पर दुकान के अलावा लोगों ने अपने घरों से बाहर फुटपाथ पर अतिक्रमण किया हुआ था। जेसीबी ने इसे तोड़ने की कोशिश की तो मामला गरमाने लगा। कई लोग विरोध में उतर आए। विरोध को देखते हुए पुलिस फ्रंट फुट पर आई तो विरोध करने वाले बैकफुट पर चले गए। यहां पर टीम ने घर के बाहर बनाई गई पानी की टंकी और सीढ़ियां तोड़ी।
यहां अतिक्रमण हटाते हुए टीम रेसकोर्स चौक पहुंची। टीम ने यहां पर कोठियों के बाहर सड़क किनारे फुटपाथ कब्जा कर बनाई फुलवारियों को तोड़ डाला। उधर, धर्मपुर सब्जी मंडी में एक दुकान के बाहर लगाई गई सीढ़ी को भी उखाड़ फेंका। टीम आराघर पहुंची और यहां पर भी कई दुकानों के बाहर से फुटपाथ कब्जाकर बनाया गया अवैध निर्माण तोड़ा गया। इस दौरान टीम ने एक गन्ने के जूस की ठेली को भी पलटा दिया।
रेसकोर्स चौक पर लगा जाम
बन्नू स्कूल के बाहर स्थित रेसकोर्स चौक पर अतिक्रमण हटाने गई जेसीबी के कारण जबरदस्त जाम लग गया। आधा घंटे तक वाहन जाम में फंसे रहे। असल में, अतिक्रमण हटाने जा रही टीम के साथ कई वाहन चल रहे थे। जिसमें जेसीबी, ट्रक, अधिकारियों के वाहन और पुलिस के वाहन शामिल हैं। चंदर रोड, त्यागी रोड और रेस्टकैंप जैसे संकरी सड़कों पर इतने सारे वाहनों ने एक साथ प्रवेश किया तो जाम की स्थिति बन गई। रेसकोर्स चौक पर तो आधा घंटे तक वाहन फंसे रहे। किसी तरह पुलिस ने जाम को खुलवाकर यातायात को व्यवस्थित किया।
हर बार की तरह इस बार भी
अतिक्रमण टीम के जाते ही फिर से फड़ और अन्य अतिक्रमण ‘अपनी’ जगह पर आ गए। कई लोगों ने टीम को इस बात की जानकारी भी दी। लेकिन टीम ने एक बार फिर मुड़कर देखना उचित नहीं समझा।