पिछले तीन वर्षों के बाद राजधानी एक बार फिर ठंड से कंपकपा गई है। वर्ष 2008 के बाद जनवरी में अभी तक रात का पारा दो डिग्री पर नहीं आया था। रविवार को यह रिकॉर्ड भी टूट गया।
दिन में धूप होने के बावजूद बर्फीली हवाओं के असर से लोग सिकुड़े रहे। दिन ढलते ही पाले का इतनी तेजी से असर शुरू हुआ कि खुले आसमान के नीचे लोगों का रहना मुश्किल हो गया। फिर भी शहर में कई स्थानों पर ऐसे भी लोग हैं जो इस बर्फ जैसी ठंड में बिना किसी छत के पड़े मिले।
रात करीब नौ बजे तक चलने वाले शहर के बाजारों में सात बजते-बजते सन्नाटा होने लगता है। ट्रेन और बसों की स्पीड थम गई है। सवारियों के भी लाले पड़ रहे हैं। स्कूलों में छुट्टियां होने के बावजूद पिकनिक स्पॉट से भीड़ नदारद है।
क्यों पड़ रही है इतनी ठंड
हवा में कम दबाव की वजह से नमी का असर लगातार 90 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है। जिसकी वजह से शाम होते ही शीत पड़ना शुरू हो जाती है और सुबह होने तक जारी रहती है। इसी तरह पिछले कुछ समय से पर्वतीय क्षेत्रों में चलने वाली हवा की रफ्तार में भी तेजी आई। जिसका असर मैदानी क्षेत्रों में पड़ रहा है। यही वजह है कि रात के तापमान में कमी आ रही है।
चार वर्षों में जनवरी के पहले सप्ताह का न्यूनतम तापमान
2009
1 जनवरी को 3.7,
2-- 4.5,
3 --6.6,
4--10.6
5-- 9.2
6--7.5
8-- 8.6
2010
1--जनवरी को 4.0
2--3.1
3--9.9
4--8.6
5--7.4
6--8.5
7--5.6
2011
1--3.5
2--5.3
3--7.6
4--6.3
5--3.9
6--3.0
7--3.9
2012
1--4.0
2--3.3
3--3.4
4--4.1
5--3.6
6--2.0