केदारनाथ मंदिर में मची तबाही के बाद जिले के पौराणिक धार्मिक स्थल भी प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने लगे हैं। केदारघाटी में प्रकृति के इस व्यवहार से हर कोई दहशत में हैं। दैवी आपदा के बाद पौराणिक धर्म स्थलों को पहुंच रही क्षति को धर्मावलंबी भी उचित नहीं बता रहे हैं।
पढ़े, उत्तराखंड आपदा की खबरों की विशेष कवरेज
गत 16/17 जून को केदारधाम में हुई तबाही से सबसे अधिक नुकसान धार्मिक स्थलों को पहुंचा है। मंदाकिनी और इसकी अन्य सहायक नदियों में आई बाढ़ से कई पौराणिक मठ-मंदिर समाप्त हो चुकें हैं, जबकि कई भूस्खलन की चपेट में हैं।
इन मंदिरों का नामोनिशान मिटा
दैवी आपदा के कारण भीमबलि मंदिर रामबाड़ा, गौरामाई मंदिर गौरीकुंड, कोटी माहेश्वरी मंदिर रुच्छ महादेव, महासरस्वती मंदिर कालीमठ, त्रिवेणी शिवालय बेडूला, नृसिंह मंदिर सेमी, पुराना देवल मंदिर अगस्त्यमुनि, चंद्रशेखर महादेव मंदिर का नामोनिशान मिट चुका है।
देवी- देवताओं के पौराणिक मंदिर समाप्त होने से हर किसी के जेहन में यही सवाल उमड़ रहा है कहीं देवी-देवता उनसे रुष्ट तो नहीं हो गए।
ये मंदिर हैं खतरे में
- बाराही मंदिर सेमी
- महालक्ष्मी और महाकाली मंदिर कालीमठ
- गंगतल महादेव
- भैरवनाथ मंदिर केदारनाथ समेत कई मंदिर शामिल।
वर्तमान में मनुष्य मूल आचरण और व्यवहार से हट चुका है, जिसके कारण ये विपदाएं आ रही हैं। ये तो मात्र चेतावनी है। अपने स्वार्थ के लिए तीर्थाटन को पर्यटन बनाने का यह फल है।
- शशिधर लिंग, मुख्य पुजारी विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी
खबर पर राय देने के लिए यहां क्लिक करें