आपदा से तहसील के 184 गांव प्रभावित हुए हैं, जिसमें से एक झड़िया भी है। यहां अभी तक न तो राहत सामग्री पहुंची और न ही शासन-प्रशासन का आला अधिकारी।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
स्थिति यह है कि प्रभावित पंचायत घर में शरण लिए हैं तो राशन के लिए सरकारी सस्ते गल्ले से उधारी की आस लगाए बैठे हैं। बृहस्पतिवार को जब अमर उजाला झड़िया गांव पहुंचा तो तबाही के अक्स ग्वाई गदेरे के मलबे में दिखाई दिए। यहां मलबे से ग्रामीण अपना सामान तलाश रहे थे।
आवासीय भवन मलबे में दब चुका था
बृहस्पतिवार 27 जून सुबह नौ बजे में चिडिंगा स्टेट से नंदकेशरी ग्वालदम पैदल मार्ग पर आधा किमी चला तो झड़िया गांव दिखा। यहां प्रभावित लोग पंचायत घर, भूकंप राहत केंद्र और एक स्थानीय दुकान में शरण लिए हुए थे। सबसे पहले मुलाकात हुई पुष्कर सिंह से जिसका आवासीय भवन मलबे में दब चुका था।
पुष्कर के तीन बच्चे अपनी मां के साथ बैठे थे और मां भागीरथी देवी बच्चों को दिलासा दे रही थी कि अभी खाने का बंदोबस्त करते हैं। मैंने जब भागीरथी देवी से पूछा कि खाना कहां से आएगा तो उन्होंने बताया कि पास में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से उधार लेकर बनाएंगे।
50 मीटर आगे ग्वाई गदेरा दिखाई दिया जिसने सोमवार की रात तबाही मचाई थी। उसके किनारे कुछ लोग जमा मलबा लगाते दिखे। हमने उनसे पूछा तो सुनील कुमार, रमेश चंद्र और पृथ्वी सिंह ने बताया कि मलबे में गांव के 5 मकान दब गए, जिसमें से अब मकानों का सामान ढूंढ रहे हैं और उसे कट्टों में भर रहे हैं।
राहत राशि नहीं मिल पाई
गदेरे से आधा किमी आगे गांव की ओर बढ़ने पर दिनेश चंद्र, हरीश चंद्र, उर्बी दत्त, गणेश प्रसाद, जगदीश प्रसाद आदि के परिवार बच्चों सहित पंचायत घर के आंगन से उफनते नाले को देख रहे थे।
जब मैंने हालचाल पूछा तो ग्रामीण बोले यहां तीन दिन बीतने के बाद भी कोई राहत राशि नहीं मिल पाई है। सरकार का कोई अधिकारी भी नहीं पहुंचा। पटवारी भी आए और केवल सर्वेक्षण कर चले गए।
गांव में जमींदोज हो चुके मकान - 5
आंशिक क्षतिग्रस्त घर - 10
प्रभावित परिवारों की संख्या - 14
कुल परिवार - 35
तहसील मुख्यालय से दूरी -15 किमी