प्रदेश में एक के बाद एक बाघों की संदिग्ध हालत में मौत हो रही है। शवों का पोस्टमार्टम कराकर विसरा जांच के लिए बरेली स्थिति इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) को भेजा जा रहा है। लेकिन जांच रिपोर्ट कहां चली जा रही है इसका कुछ पता नहीं चलता। बीते एक साल में केवल दो मामलों की ही जांच रिपोर्ट सामने आ पाई है।
दो मामलों की ही जांच रिपोर्ट मिली
पिछले एक साल में लगभग 10 बाघों का शव मिल चुका है। इनमें से अधिकतर बाघों की मौत संदिग्ध हालत में हुई है। पोस्टमार्टम के बाद जांच के लिए विसरा आईबीआरआई और देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान को भेजा गया था। लेकिन इस अवधि में केवल दो मामलों की ही जांच रिपोर्ट मिली है। अन्य मामलों पर पर्दा पड़ा हुआ है।
जंगलात महकमे के अधिकारी केवल विसरा को लैब में भेजकर अपने कर्तव्य का इतिश्री समझ लेते है। लैब से जांच रिपोर्ट को मंगवाने की कोशिश नहीं की जाती, जिससे मामलों का खुलासा हो सकें। अधिकारी केवल तथ्यों को छुपाने की कोशिश करते है, जिससे कुछ समय के लिए उनकी जान बच जाए।
इन मामलों का हुआ खुलासा
- कार्बेट के बिजरानी रेंज में 24 मई 2012 को मांस मिला था। जांच के लिए नमूना भारतीय वन्यजीव संस्थान को भेजा गया। पहले जांच रिपोर्ट को छुपाया गया, लेकिन छह महीने बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट में बाघिन की मांस होने की पुष्टि हुई।
- राजाजी के गौहरी रेंज में फरवरी 2013 में एक बाघ और सूअर मरे मिले। दोनों का नमूना बरेली भेजा गया। जांच रिपोर्ट में बाघ के मरने की पुष्टि जहर से हुई। सूअर के शरीर में भी जहर पाया गया।