छात्र-छात्राओं से मोटी फीस वसूलकर डकार तक न लेने वाले शिक्षण संस्थान अब सर्विस टैक्स के दायरे में होंगे। एजुकेशन फ्री होगी, लेकिन इन संस्थानों में किसी बाहरी कार्यक्रम को कराने से होने वाली आय को इस दायरे में शामिल किया गया है। इनमें यहां होने वाले सेमिनार, फेट आदि सभी तरह के आयोजन शामिल किए गए हैं। कमाई पर 12.36 प्रतिशत सर्विस टैक्स लगेगा।
दून में तकरीबन पांच सौ से ज्यादा शिक्षण संस्थान हैं। इनमें से ज्यादातर किसी-न-किसी दिन किसी सेमिनार, कांफ्रेंस या किसी दूसरे कार्यक्रम के चलते बुक रहते हैं। कई बार परीक्षा कराने के लिए भी कई गैर-सरकारी संस्थाएं, संस्थान इन्हें किराए पर लेते रहे हैं। पहले इनसे होने वाली आय सर्विस टैक्स के दायरे में नहीं थी।
आगामी एक अप्रैल से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क एवं सेवा कर के अधीक्षक तापस चक्रवर्ती के अनुसार सभी शिक्षण संस्थानों की सूची अपडेट की जा रही है।