एक ओर पत्थरों के ढेर तो दूसरी ओर हर ओर मलबा, कीचड़। इनके बीच अभ्यास के लिए मैदान तलाशना राजधानी के खिलाड़ियों की मजबूरी बन गई है। यह नजारा है परेड ग्राउंड में बने खेल परिसर का।
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यहां तीन खेलों के कोर्ट बनाने का काम शुरू कर बीच में छोड़ दिया। खुदाई के कारण बेसबॉल का कोर्ट गायब हो गया है तो पत्थरों के ढेर खतरे का सबब बने हुए हैं।
सितंबर माह से अमूमन खेल प्रतियोगिताएं शुरू हो जाती हैं। इसके लिए मई से अभ्यास सत्र प्रारंभ होता है, लेकिन इस बार सत्र की शुरुआत के साथ ही परेड ग्राउंड पर वालीबाल, बास्केटबाल और टेनिस कोर्ट बनाने के लिए खुदाई शुरू कर दी गई।
काम अधूरा छोड़ दिया
इससे खिलाड़ियों के अभ्यास पर असर पड़ा। इस बीच इन कोर्ट को खेल परिसर के साथ ही बनाने के निर्देश आने पर जून में काम अधूरा छोड़ दिया गया। इसके बाद बेसबॉल का शिविर गायब है तो क्रिकेट खिलाड़ी भी पिच तक सिमट गए हैं। हालांकि मैदान के निचले हिस्से में हैंडबाल, फुटबाल, हॉकी और वॉलीबाल के शिविर लगाने की जगह है, लेकिन मैदान में पत्थर डालने और खुदाई के कारण अन्य खेलों के भी प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।
मैदान बनाने का काम एक साथ शुरू होगा, जिस कारण खिलाड़ियों को थोड़ी परेशानी तो होगी। मगर खेल सत्र प्रभावित न हो इसके लिए उसे दूसरी ओर के मैदान में शिफ्ट किया जाएगा। ताकि प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को तैयार किया जा सके।
-राजेश ममगाईं, जिला खेल अधिकारी
खतरे के बीच चल रहा बेसबॉल कैंप
परेड ग्राउंड के दूसरे हिस्से में इन दिनों जुलाई अंत में प्रस्तावित राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए बेसबॉल कैंप लगाया जा रहा है। लेकिन यहां न तो कोर्ट है, न बेसबॉल मैदान। ऊबड़-खाबड़ मैदान में खिलाड़ी तैयारी तो कर रहे हैं, लेकिन यहां से आने-जाने वाले वाहन खतरा बने रहते हैं। राहत आपदा सामग्री ले जा रहे ट्रकों के भी यहीं से आवाजाही करने के कारण खिलाड़ियों को हमेशा डर लगा रहता है।