आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर सहित पूर्वोत्तर राज्यों में सैन्य अफसर बनने वालों युवाओं की संख्या कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि इस बार जम्मू-कश्मीर उन टॉप टेन राज्यों में शामिल है, जहां के सर्वाधिक युवा शनिवार को भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से पासआउट हुए।
8 जून को जम्मू-कश्मीर के 32 कैडेट पासआउट हुए। इसके उलट वर्ष 2012 के दौरान पास आउट हुए दो बैचों में जम्मू-कश्मीर के 40 युवा ही थे। हर साल आईएमए से युवा अफसरों के दो बैच पासआउट होते हैं। 2011 के दो बैचों में जम्मू-कश्मीर के 31 युवा पासआउट हुए थे।
सेना में आने की वजह बेरोजगारी
सेना में इन राज्यों से ज्यादा युवाओं के आने की एक वजह बेरोजगारी भी है। लेकिन सेना का मानना है कि बेरोजगारी के बावजूद सेना में इन राज्यों के युवा कम ही आना चाहते हैं। यही वजह है कि सेना अपनी तरफ से इन राज्यों के युवाओं को आकर्षित करने के लिए कई तरह के कार्यक्रम चला रही है। जम्मू-कश्मीर में सेना 1998 से आपरेशन सद्भावना चला रही है।
युवाओं को सेना के प्रति आकर्षित करना इसका मकसद है। इसके साथ ही कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स भी युवाओं को जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। पूर्वोत्तर राज्यों में असम राइफल्स ने भी युवाओं को सेना के प्रति उत्साहित करने के लिए कई कार्यक्रम चलाए हैं।
सेना युवाओं को आकर्षित करने के लिए जगह-जगह आर्मी मेला भी आयोजित कर रही है। दरअसल, सेना में अधिकारियों की कमी को दूर करने और आतंक प्रभावित राज्यों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़े रखने के उद्देश्य से सेना लगातार कवायद कर रही है।
सेना में फिलहाल साढ़े 11 हजार अधिकारी कम हैं। उल्लेखनीय है कि सेना में स्वीकृत पदों की संख्या 48 हजार हैं। जबकि कुल अधिकारियों की संख्या 36,500 ही हैं।
मणिपुर के 10 कैडेट्स
बहरहाल, हाल के वर्षों में मणिपुर से सर्वाधिक युवा एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं के माध्यम से सेना में शामिल हुए हैं। इस बार यानी 132 वें कोर्स (आईएमए) में मणिपुर के 10 कैडेट्स हैं। पिछली बार मणिपुर के कैडेट संख्या छह थी। इस बार असम से चार, अरुणाचल, मेघालय, त्रिपुरा का भी एक-एक युवा सेना में शामिल होगा। बीते तीन बरस में इन राज्यों से 65 युवा अकादमी में सफलता पूर्वक ट्रेनिंग ले चुके हैं। पिछले तीन साल में मणिपुर के 33 युवा सेना में आफिसर बने हैं।