त्यूनी। दैवी आपदा ने जौनसार के कई गांवों में पेयजल संकट खड़ा कर दिया है। बारिश, भूस्खलन से करीब 50 एकल पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे करीब डेढ़ हजार परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
इस बरसात में चकराता विकासखंड की 50 एकल पेयजल योजनाएं आपदा की भेंट चढ़ गई। जिससे दर्जनों गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है।
ग्रामीणों को एक बंठा पानी के लिए लंबी दौड़ लगानी पड़ रही है। 15/16 जून को क्षेत्र में हुई भारी और भूस्खलन से 36 पेयजल योजनाएं पहले से ही क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। उसके बाद भी बारिश का कहर जारी है। भूस्खलन से 50 एकल पेयजल योजनाओं के चैंबर क्षतिग्रस्त हो गए हैं, पाइप लाइनें बह गई है। गाड़-गदेरों के उफनने से ग्रामीण लाइनों की अस्थायी मरम्मत भी नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कुनावा, चंदेऊ खेड़ा, डेरसा, कुल्हा, कूणा, रडू, डाबर, बगोत, चांदनी, जिटाड़, कठंग, मझोग, छुमरा, बायला, बुरायला, रजाणू, मशक समेत 50 गांवों की पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त पड़ी हैं।
जिटाड़ के प्रधान मंगतराम, रजाणू के प्रधान देवीराम का कहना है कि ग्रामसभाओं के पास इतना बजट नहीं होता कि लाइनों की मरम्मत कराई जा सके। मजबूरी में गदेराें का दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
बारिश से 50 एकल पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। जिनका इस्टीमेट तैयार कर ग्राम्य विकास विभाग को भेजा गया है। करीब 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
बीएस डोगरा, एसडीओ जल संस्थान