देहरादून। बाबा केदार के मंदिर को 30 फीट के बोल्डर ने बचाया। यही वजह थी कि बड़ी तबाही की सीधी चोट मंदिर पर नहीं लगी। यह बोल्डर मंदिर से 10 फीट ऊंचाई पर आकर रुका। 16 जून को आई आपदा में मंदिर तो बचा, लेकिन इसके द्वारों ने आपदा के जख्म झेले। इसके पूर्वी द्वार के साथ ही पश्चिमी द्वार से भी पत्थर निकल गए हैं। साथ ही मंदिर के चबूतरे पर स्थित ईशान मंदिर भी खत्म हो गया है। अब मंदिर के आस-पास फैले मलबे को हटाया जाना विशेषज्ञ बड़ी चुनौती मान रहे हैं।
आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया यानी एएसआई की टीम ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में इन तथ्यों को उजागर किया है। सभी वैज्ञानिक, सर्वेक्षण संस्थानों में यह चार सदस्यीय टीम सबसे पहले मंदिर क्षेत्र में पहुंची। विशेषज्ञों के मुताबिक मंदिर की मुख्य शिला को तो क्षति पहुंची ही है, मंदिर के गर्भगृह के उत्तर-पूर्वी कोेने भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मंदिर के भीतर तकरीबन ढाई-तीन फीट तक गाद भरी है। सीढ़ियाें तक पर यह गाद है। सोमवार को टीम सदस्य दून में रहे। इन्होेंने केदारघाटी की तस्वीरें भी स्थानीय दून सर्किल कार्यालय को मुहैया कराईं।
यह हैं सुझाव-
मंदिर और आस-पास के क्षेत्र का जीपीएस सर्वे हो
यहां तक पहुंचने वाले संपर्क मार्ग को दुरुस्त किया जाए
नुकसान का डाक्यूमेंटेशन, इसके बाद ही पुनरुद्वार
कहीं फिर से न आए मलबा
मंदिर के आस-पास जिस तरह से मलबा फैला है, उसे हटाए जाने में नए मलबे के नीचे खिसक आने की दिक्कत पैदा हो सकती है। इस संबंध में भूगर्भ वैज्ञानिकों को अपनी रिपोर्ट देनी है, लेकिन इस टीम की मानें तो अभी सर्वे शुरू नहीं हुआ है।
एसपी रूद्रप्रयाग के सहारे वापस
एएसआई की टीम को हवाई मार्ग के जरिए केदारघाटी छोड़ तो दिया गया, लेकिन वापसी में बहुत दिक्कत हुई। यह टीम एसपी रूद्रप्रयाग की मदद से गरुड़चट्टी तक पहुंची।
डीजी को जा रही है रिपोर्ट
जिस विशेष टीम को केदारघाटी भेजा गया था, उसकी रिपोर्ट मिल गई है। इसे अब महानिदेशक यानी डीजी को भी भेजा जा रहा है। रिपोर्ट में आगे की कार्रवाई के मुख्य बिंदु सुझा दिए गए हैं।
--अतुल भार्गव, अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई, दून सर्किल।