राजपुर के वीरगिरवाली में जंगल की जमीन कब्जाने के मामले में आईपीएस अधिकारी बीएस सिद्धू ने डीएफओ मसूरी समेत तीन अन्य के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले में सिद्धू पर पहले ही केस हो चुका है, जिसमें कुछ दिन पूर्व चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
षड्यंत्र रचने का आरोप
थाना राजपुर में दर्ज कराए गए मुकदमे में वीर गिरवाली (ओल्ड मसूरी रोड) के खसरा नंबर एक में दर्ज जमीन के मामले में आईपीएस बीरेंद्र सिंह सिद्धू निवासी पुलिस ऑफिसर कालोनी किशनपुर ने मसूरी के प्रभारी वन अधिकारी धीरज पांडे, फारेस्ट गार्ड श्रीप्रसाद सकलानी, वेद प्रकाश महावर और उसके भाई सतीश गुप्ता पर धोखाधड़ी और षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है।
सिद्धू का आरोप है कि आरोपियों में शामिल सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों ने धोखा देकर उन्हें नुकसान पहुंचाया और अपमानित भी किया। मामले की जांच के लिए दारोगा रणवीर चंद्र रमोला को विवेचना अधिकारी बनाया गया है।
यह था मामला
कोर्ट में दिए गए आरोपपत्र के मुताबिक 18 मार्च 2013 को वन दारोगा ने गश्त के दौरान वीर गिरवाली के जंगल में एक खंडहर के पास साल के 21 हरे पेड़ कटे देखे। मौके पर केवल ठूंठ मौजूद थे। विभाग की जांच में पता चला कि ये पेड़ आईपीएस बीएस सिद्धू ने कटवाए हैं। सिद्धू पर करीब दस बीघा सरकारी जमीन को निजी भूमि बताने का भी आरोप लगा।
सिद्धू ने रिकार्ड में जमीन अपने नाम दर्ज करा ली थी। रिकार्ड की जांच हुई तो जमीन किसी नत्थूराम से खरीदने की बात पता चली। लेकिन, नत्थूराम के बयान लेने की कोशिश की गई तो पता चला कि जिस नत्थूराम को विक्रेता बताया गया था, उसकी मौत वर्ष 1983 में ही हो चुकी थी। सर्किल रेट के हिसाब से जमीन की कीमत करीब छह करोड़ रुपये थी, जबकि सिद्धू ने इसके लिए सवा करोड़ रुपये दिए थे।
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