ऋषिकेश। बीते जून माह में तीन दिनों तक लगातार जारी बरसात के चलते स्थानीय प्रशासन को मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद न तो समय रहते हाईअलर्ट जारी किया गया था और न ही गंगा और सहायक नदियों के तटों पर बसी अवैध झुग्गी-झोपड़ियों और कालोनियों को ही खाली कराया गया था। इतना ही नहीं मंदाकिनी नदी और गंगा के उफान के बावजूद 16 जून को भी तीर्थनगरी से चारधाम के लिए हजारों यात्री रवाना किए गए। नतीजतन इनमें से कई यात्री केदारघाटी में आपदा की चपेट में आए और कइयों को विभिन्न यात्रा मार्गों पर कई-कई दिनों तक फंसना पड़ा, जिन्हें रेस्क्यू के बाद ही निकाला जा सका।
तीर्थनगरी में 14 जून की शाम से मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हुआ था। 15 जून को जारी बारिश के कारण नदी तटीय कई इलाके जलमग्न हो गए थे। ग्रामीण इलाकों में गंगा और अन्य सहायक नदियों, नालों-खालों से आए पानी के कारण कई लोगों के खेत बह गए थे। बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन की ओर से 16 जून को हाईअलर्ट जारी करने की सुध आई। बावजूद इसके नदी तटीय इलाकों को बाढ़ के चलते चेताया तो गया, खाली नहीं कराया गया। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 16 जून को अपराह्न में गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा को पार कर गया था, जबकि शाम के समय यह 50 सेमी ऊपर आंका गया था। इसी रात को चंद्रेश्वनगर के कई इलाकों में जलभराव के कारण रेस्क्यू कर निकाला गया था।
मजेदार बात यह है कि 14 जून की शाम से लगातार जारी मूसलाधार बारिश के बावजूद 15 जून को प्रशासन द्वारा चारधाम यात्रा नहीं रोकी गई, इस दिन 2442 तीर्थयात्री चारधाम गए। इतना ही नहीं विभिन्न परिवहन कंपनियों की ओर से लगातार जारी बरसात के कारण एहतियातन 16 जून को तीर्थनगरी से तीर्थयात्रियों को वाहनों से रवाना नहीं किया गया, इसके लिए प्रशासन की ओर से उन्हें कोई निर्देश नहीं दिए गए थे।
हालांकि, 16 जून को ही यात्रा प्रशासन संगठन की ओर से लगातार बारिश के कारण यात्रा मार्गों के कई स्थानों पर अवरुद्ध होने से यात्रियों को चारधाम यात्रा पर नहीं जाने का सुझाव दिया गया। इसी दिन प्रशासन की ओर से यहां रोके गए यात्रियों को ठहरने के लिए नगर के विभिन्न होटल, धर्मशालाओं को निर्देश दिए गए थे।
यही स्थिति मौसम विभाग की इस बार भारी बारिश की चेतावनी पर भी है। प्रशासन की ओर से चेतावनी के दृष्टिगत अलर्ट जारी किया गया है, मगर गंगा और सहायक नदी तटों में कई लोगों को अभी तक न तो चेतावनी की जानकारी है न ही अलर्ट की। इतना ही नहीं शुक्रवार को भी नदी तटीय अवैध बस्तियों में लोग जमे हुए थे, मानवीय गतिविधियां सामान्यरूप से जारी थी।
तबाही के बावजूद चारधाम भेजे गए यात्री!
ऋषिकेश। बीते माह तीन दिन तक लगातार जारी मूसलाधार बारिश और जलप्रलय से हुई त्रासदी के बावजूद 17 जून को भी तीर्थनगरी से साढ़े छह हजार से अधिक श्रद्धालु चारधाम रवाना हुए थे। नगरपालिका के पंजीकरण कार्यालय के अनुसार 17 जून को 6774 तीर्थयात्रियों ने विभिन्न धामों के लिए अपना पंजीकरण कराया।