देहरादून। बारिश और बाढ़ से तबाही के बाद बरसाती पानी बीमारियां उगल सकता है। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में डायरिया, टाइफाइड और पीलिया का खतरा पैदा हो गया है। साथ ही वायरल संक्रमण फैल सकता है। इससे हाई फीवर, सांस की दिक्कत पैदा हो सकती है। बरसाती बीमारियों के इस नए हमले को झेलने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी नहीं की है।
अगस्त 2010 में बारिश और बाढ़ के बाद राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में डायरिया, उल्टी-दस्त, गैस्ट्रोइंटाइटिस और दूसरी पेट की बीमारियों ने महामारी की शक्ल अख्तियार कर ली थी। दून अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डा. केसी पंत ने बताया कि बारिश और बाढ़ के बाद पेट की बीमारियां तो बढ़ती ही हैं। इसके साथ ही मलेरिया, चर्म रोग और फफूंदी का संक्रमण बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि बरसाती संक्रमित पानी पाइप लाइन में चला जाता है। इससे पेट की बीमारियां फैलती हैं। जौलीग्रांट मेडिकल कालेज की कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की डा. रुचि जुयाल ने बताया कि तराई वाले क्षेत्रों में मलेरिया अधिक पाया जाता है। इस क्षेत्र में पेट के रोग अधिक फैलते हैं।
---------------------
सामान्य बातें, इनका ख्याल रखें
.पानी उबाल कर पिएं
.सब्जियां पानी से खूब धोकर खाएं
.नम कपड़े न पहनें, धूप में सुखा लें
.घर के आसपास पानी का ठहराव न होने दें
.ठहरे पानी में मिट्टी का तेल डालें
.घर और बाहर सफाई रखें
----------------------
.दून अस्पताल में 50 अतिरिक्त बेड की हमेशा व्यवस्था रहती है। दवाएं और फ्लुइड भी उपलब्ध है। इसी तरह कोरोनेशन में भी किसी इमरजेंसी से निपटने के इंतजाम रहते हैं। महामारी फैलेगी तो निपट लिया जाएगा।
-डॉ आरपी भट्ट, मुख्य चिकित्साधिकारी