बादल शनिवार शाम से जो बरसे तो थमने का नाम न लिया। रविवार को राजधानी के अधिकांश हिस्से पानी से लबालब हो गए। मकान गिरे, पुल टूटे और पुलिया धंस गईं।
विभिन्न क्षेत्रों, कालोनियों में त्राहि-त्राहि का माहौल रहा। चौतरफा पानी-पानी नजर आया। बिंदाल, रिस्पना, सोरना आदि नदियों के किनारे बसे लोगों को दूसरे स्थानाें पर शिफ्ट कर दिया गया। खस्ताहाल घरों के परिवारों को हटा दिया गया है।
चारों तरफ पानी भर गया
बरसाती नदी बिंदाल के उफान पर आने से चारों तरफ पानी भर गया। जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने निरीक्षण के बाद ढाई सौ लोगों के रहने की व्यवस्था जनपथ कॉम्प्लैक्स में कर दी। जिला पूर्ति अधिकारी को भोजन की व्यवस्था के निर्देश दिए गए। रिस्पना नदी किनारे से 19 परिवारों को शिफ्ट किया गया। इनके रहने की व्यवस्था टीएचडीसी केदारपुरम भवन में की गई है। सौंग नदी किनारे बसे कुछ परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है।
नालों के किनारे झुग्गी-झोपड़ी डाले लोगों को हटा दिया गया। जो परिवार खस्ताहाल घरों में रह रहे थे, उन्हें खतरे के मद्देनजर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया। स्कूल की दीवार गिरने से ठाकुरपुर गांव में जलभराव हो गया था। तहसीलदार ने फायर ब्रिगेड बुलवाकर यहां से पानी निकलवाया। रिस्पना नदी की बाढ़ नई बस्ती, बलवीर रोड, तेग बहादुर रोड, मोहनी रोड, संजय कालोनी, चंदर रोड आदि क्षेत्रों में गिर गया। यहां अधिक मात्रा में पानी आने से बिजली का पोल गिर गया।
पुल बह गया
एडीएम फाइनेंस झरना कमठान और एडीएम प्रशासन हरक सिंह रावत अलग-अलग क्षेत्रों में राहत कार्य की कमान संभाले रहे। न्यू पटेल नगर में मकान गिर गया। भट्टोवाला में पुल बह गया। सोरना नदी की बाढ़ से गोविंद गढ़ आजाद कालोनी की बस्ती में मकान ढह गया। सेलाकुई जमनीपुर नदी का जलस्तर बढ़ने से यहां के 50 परिवारों को फौरन मकान खाली करने के लिए कहा गया। एसडीएम विकासनगर से लोगों के रहने की व्यवस्था स्कूल और पंचायत घर में करने के लिए कहा गया।