स्कूलों के वर्गीकरण को ठीक किए बगैर तबादलों से नाराज शिक्षकों ने गांधी पार्क में प्रदर्शन कर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने 17 जून को सचिवालय कूच और शनिवार (आज) केंद्रीय मंत्री हरीश रावत से मिलकर अपनी पीड़ा से उन्हें अवगत कराने का निर्णय लिया है। शिक्षकों ने कहा कि 12 सूत्रीय मांगों पर अमल किए बिना यदि शिक्षकों के तबादले किए गए तो इसका विरोध किया जाएगा।
राजकीय शिक्षक संघ के शिक्षकों ने कहा कि स्कूलों के सुगम-दुर्गम के वर्गीकरण (कोटिकरण) की कोई मान्य तिथि नहीं है। विभाग की ओर से वर्ष 2004, 2005, 2007, 2008 और 2011 में स्कूलों का जो वर्गीकरण किया गया, उसमें कई स्कूल दुर्गम और अति दुर्गम की श्रेणी में थे। जो वर्ष 2013 की नियमावली के अनुसार सुगम हो गए हैं। इससे शिक्षकों को उनकी वर्षों पुरानी सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कोई आधार नहीं
जबकि सुगम, दुर्गम निर्धारण में मकान किराए भत्ते का भी कोई आधार नहीं बनाया गया। शिक्षकों ने डायट और एससीईआरटी के शिक्षकों को अनिवार्य तबादलों की पात्रता सूची में शामिल न किए जाने का भी विरोध किया। शिक्षकों ने कहा कि उनका समान कैडर है, इन शिक्षकों को सूची से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
ज्ञापन दिया
शिक्षकों ने अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षा सचिव और शिक्षा महानिदेशक कार्यालय में ज्ञापन दिया। धरना देने वालों में संघ के जिलाध्यक्ष नरेंद्र बिष्ट, जनपद मंत्री नागेंद्र पुरोहित, उमा मेहरा, रंजना गुसांई, अनिता रावत, रचना अग्रवाल, संगीता खत्री, अर्चना, पवन शर्मा, संजीव बालियान आदि शामिल थे।