नौकरी की प्रतीक्षा में उम्र 26 से 43 साल की हो गई। वह तीन बेटियों और एक बेटे का पिता बन गया। पत्नी अनपढ़ थी तो घर का काम देखती रही। वह मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पेट पालता रहा। इस बीच बड़ी बेटी की शादी कर्ज लेकर की। जवानी में लेखपाल की ट्रेनिंग दी थी और नौकरी 17 साल बाद अधेड़ उम्र में मिली।
जिंदगी ही छीन ली
खुशियां संभालने और ख्वाब बुनने में एक माह ही बीता था कि काल ने जिंदगी ही छीन ली। अब पत्नी और बच्चों की सूनी आंखों में भविष्य की भयावह तस्वीर है। इस परिवार पर सिस्टम के कहर के बाद कुदरत ने भी रहम नहीं किया।
दून की सदर तहसील में तैनात लेखपाल पदम सिंह (43) की बृहस्पतिवार को छत से गिरकर हुई मौत से हर कोई स्तब्ध है।
कालसी के उपरोली गांव निवासी पदम सिंह पुत्र मोहन सिंह ने एक माह पहले लेखपाल के रूप में ड्यूटी ज्वाइन की थी। 17 साल बाद नौकरी मिलने से वह बहुत खुश था। वह बच्चों की हर ख्वाहिश पूरी करना चाहता था। पड़ोसी बताते हैं कि गरीबी में पला बड़ा पदम जब पढ़ाई के लिए गांव से निकला तो जेब में धेला नहीं था, लेकिन इरादों में चमक थी। मेहनत-मजदूरी करके बीए किया।
परिवार में कोई कमाने वाला नहीं
इसके बाद उसका सलेक्शन लेखपाल के लिए हो गया। वर्ष 1996 में उन्होंने मंडलीय प्रशिक्षण केंद्र अल्मोड़ा से ट्रेनिंग ली, लेकिन ज्वाइनिंग पर रोक लगने से सपने बिखर गए। वह कालसी आ गया और किराए के मकान पर रहने लगा। मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करने लगा। सत्रह साल बाद नौकरी का कॉल लेटर घर पहुंचा तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था। पदम की मौत के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। पत्नी प्यारो देवी अनपढ़ हैं तो दूसरी बेटी पूजा 17 साल की है। तीसरी बेटी सपना 16 और बेटा अभय 14 साल का है। तहसीलदार हर गिरी बताते हैं कि सेवा नियमावली के अनुसार मृतक आश्रितों को सहायता प्रदान की जाएगी।