फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निरंकारी समागम में उमड़े बाबा के हजारों अनुयाई

Fri, 14 Jun 2013 01:31 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
निरंकारी रेस्ट कैंप में आयोजित संत निरंकारी बाबा हरदेव सिंह के प्रवचन सुनने के लिए उनके हजारों अनुयाई उमड़ पड़े। क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या नौजवान सभी ने संत की एक झलक पाने के लिए घंटो के इंतजार से भी नहीं कतराए।
विज्ञापन


निरंकारी समागम में संत हरेदव बाबा ने प्रवचन सुनने पंहुचे अपने हजारों अनुयाइयों को बताया कि एकत्व केवल शब्द नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। साथ ही कहा कि एकत्व की भावना को विश्व में फैलाने से पहले एकत्व को स्वंय धारण करना होगा। सहनशीलता, विशालता, दया-करुणा, प्रेम एवं नम्रता जैसे दिव्य गुण हर इंसान के व्यवहार में प्रकट होने चाहिए थे लेकिन इंसान इन्हें भुलाता जा रहा है।

उन्होंने अपने अनुयाइयों से मानवता को एक होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आत्मा को परमात्मा का बोध होना चाहिए क्योंकि एक दिन आत्मा ने परमात्मा में ही विलीन हो जाना है। संत हरदेव बाबा ने अपने प्रवचन में कहा कि इंसान अज्ञानता के कारण भ्रमों में फंसा हुआ है। इंसान यदि गफलत की नींद से जागकर ज्ञान के उजाले को प्राप्त कर ले तो सभी भ्रमों का नाश स्वत: हो जाएगा।
विज्ञापन


ऐन मौके पर बन्नी स्कूल के बजाय निरंकारी भवन में आयोजित किए गए समागम के चलते हजारों की संख्या में उमड़े अनुयाइयों को मुश्किलें तो उठानी पड़ी लेकिन अनुयाइयों की श्रद्घा में कोई कमी नहीं दिखी। श्रद्घालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया था।

गढ़वाली, कुमाउनी, नेपाली और पंजाबी
निरंकारी समागम में बाबा हरेदव सिंह के अनुयाइयों ने भाषा और बोली के भेद से ऊपर उठकर अपनी भक्ति का इजहार किया जिसमें सब रंगे नजर आए। अनुयाई अपनी-अपनी बोली भाषा में यूं भजन कीर्तन गाते चले गए मानो समागम का हर शख्श हर लफ्ज से जुड़ा हो। समागम में गढ़वाली, कुमाउनी, नेपाली, राजस्थानी और पंजाबी में बाबा के गीत गाए।

मेरे मुहल्ले को बख्श दो
त्यागी रोड पर निरंकारी समागम होने से पुलिस ने एक ओर से ट्रैफिक को डायवर्ट किया हुआ था, जिससे स्थानीय निवासियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। निरंकारी भवन के आसपास रहने वाले लोगों की शिकायत थी कि बाबा हरदेव के अनुयाइयों और सत्संगो के चलते उन्हें आए दिन तकलीफे उठानी पड़ती हैं। स्थानीय निवासी मंजीत सिंह का कहना था कि समागम हो लेकिन व्यवस्थाएं महज बाबा से मिलने और समागम के लिए ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगों की भी हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें