देहरादून। वैसे तो जंगल के राजा का पसंदीदा शिकार हिरन और सांभर होते हैं लेकिन आजकल वह गाय-भैंस और बकरियों का शिकार करके पेट भर रहा है। कहा जा सकता है कि जंगल का राजा नकारा होता जा रहा है लेकिन यदि हालात पर नजर डालें तो पता चलता है कि परिस्थितियां ही कुछ ऐसी बना दी गई हैं कि राजा अपना पसंदीदा आहार छोड़कर आसान शिकार कर रहा है। दरअसल, बाघों को जंगलों में पालतू पशु आसानी से मिल जा रहे हैं, जबकि पालतू पशुओं की मौजूदगी की वजह से हिरन और सांभर जंगल से गायब होते जा रहे हैं।
कार्बेट टाइगर रिजर्व से लेकर हरिद्वार वन प्रभाग तक के जंगलों में गाय, भैंस, बैल, बकरियों की संख्या सात हजार से अधिक हो गई है। इतनी संख्या में शायद ही हिरन और सांभर हों। कार्बेट टाइगर रिजर्व, तराई वेस्ट वन प्रभाग और लैंसडौन वन प्रभाग की पड़ताल के दौरान तीन या चार स्थानों पर ही हिरन और सांभर के झुंड दिखे, जबकि उससे कई गुना अधिक पालतू पशु घूमते नजर आए।
कार्बेट टाइगर रिजर्व में रहने वाले वन गुज्जर रोशन दीप बताते हैं कि भैंस अगर झुंड में है तब बाघ के लिए शिकार करना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन अकेले पड़ते ही बाघ मिनटों में उसे मार देता है। गाय, बकरी बैल का बाघ जब शिकार करता है, उस समय दूसरे पशु भाग खड़े होते हैं। पालतू पशुओं को बाघ के आने या होने का अंदाजा भी नहीं होता, जबकि हिरन और सांभर बाघों के आने की आहट लगा लेते हैं। हिरन और सांभर तेजी से उछलते और भागते हैं, जिससे शिकार करने के लिए बाघ को मेहनत करनी पड़ती है।
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पूरे कार्बेट लैंडस्केप (कार्बेट, राजाजी, रामनगर, तराई वेस्ट, लैंसडोन वन प्रभाग) में पालतू पशुओं के रहने से बाघों के शिकार करने का पैटर्न बदला है। पहले वह घात लगाकर हिरन को मारने के लिए घंटों इंतजार करता था। लेकिन अब गाय, बैल, बकरी और भैंस को आसानी से निवाला बना लेता है। साथ ही जंगल में पालतू पशुओं के प्रवेश से हिरन, सांभर आदि के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। हिरणों के हिस्से का चारा पालतू पशु खा रहे हैं। - डा.विभाष पांडव, वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान
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वन गुज्जर पहले जब जंगल में रहते थे, उस समय वे पालतू पशु खुद के लिए पालते थे। अब पालतू पशु रोजगार के साधन हो गए हैं। टाइगर रिजर्व में पशु पालने की परंपरा को खत्म करना होगा। तभी बाघ बचेंगे। अगर ऐसा नहीं करना है तो सरकार को टाइगर रिजर्व के बजाय पालतू पशु रिजर्व घोषित कर देना चाहिए।
- गौरी मौलेखी, सदस्य सचिव पीएफए उत्तराखंड