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महिला सशक्तीकरण की अवधारणा बदलें : राज्यपाल

Thu, 14 Mar 2013 05:31 AM IST
Dehradun
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देहरादून। राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी ने बुधवार को महिला उद्धार और सशक्तीकरण की वर्तमान अवधारणा को बदलने की जरूरत बताई। कहा कि इसके लिए शुरुआत उन महिलाओं से करनी होगी, जो घर-परिवार चलाने के लिए कड़ी मेहनत करती हैं। अपने ख्वाब दफन कर देती हैं। वह यहां उत्तरांचल महिला एसोसिएशन (उमा) की ओर से राजभवन में हुए उमा शक्ति सम्मान समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आयोजकों से अगला कार्यक्रम ऐसी महिलाओं के लिए करने को कहा, जिन्हें अपने अधिकारों का ज्ञान नहीं, जिनके पास स्वयं को सशक्त बनाने के लिए न पर्याप्त साधन हैं और न रास्ते। एसोसिएशन की सचिव नीलिमा गर्ग ने संस्था की गतिविधियों का विवरण दिया। इस दौरान महिला आयोग उत्तराखंड की पूर्व अध्यक्ष सुशीला बलूनी, पंजाब नेशनल बैंक के मंडल प्रमुख अशोक अनेजा, उद्योगपति राकेश धवन, एस फारुख आदि उपस्थित रहे।
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कत्थक से दिखाया ‘कृष्ण विरह’
उमा शक्ति सम्मान समारोह में नृत्यांगना मृदुला मराठे ने कत्थक नृत्य के माध्यम से ‘कृष्ण विरह’ दर्शाया। तराना भी पेश किया। इला पंत के निर्देशन में ‘वंदे मातरम’ और ‘गंगा बहती हो क्यों’ की प्रस्तुति दी गई। उमा की अध्यक्ष साधना शर्मा रचित गीत ‘ये कली जब तक फूल बनके खिले, मत वार करो...’ की भी दून किड्स की छात्राओं ने प्रस्तुति दी।
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इन आठ महिलाओं को मिला उमा-शक्ति सम्मान :
1. कविता (समाज सेवा)
2. अनिता (समाज सेवा)
3. आरती दीक्षित (शिक्षा)
4. सिस्टर ग्रेसी पॉल (शिक्षा)
5. डा. सुमिता प्रभाकर (चिकित्सा)
6. डा. मंजुल खन्ना (चिकित्सा)
7. तान्या बख्शी (पत्रकारिता)
8. आस्था टंडन (पत्रकारिता)
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