देहरादून। लिंक एक्सप्रेस ट्रेन के एसी कोच में दून से कानपुर के लिए ई-टिकट से आरक्षण के बावजूद यात्री को एसी कोच के बजाए स्लीपर से यात्रा करनी पड़ी। जिला उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में डिविजनल मैनेजर और स्टेशन मास्टर को द्वितीय एसी क्लास व स्लीपर क्लास किराए के अंतर की धनराशि अदा करने के निर्देश दिए हैं।
कृष्णनगर दून निवासी विजय कुमार ने जिला उपभोक्ता फोरम में दायर वाद में बताया कि 19 फरवरी वर्ष 2012 को उन्होंने लिंक एक्सप्रेस ट्रेन से दून से कानपुर जाने के लिए एसी कोच में ई-टिकट से आरक्षण कराया था। जिसके लिए उन्होंने 1019 रुपये की धनराशि ऑन लाइन अदा की, लेकिन जब वे स्टेशन पहुंचे तो उन्हें एसी कोच में स्थान न देकर उन्हें स्लीपर कोच से यात्रा के लिए बाध्य किया गया। इससे सर्दी में उन्हें परेशानी उठानी पड़ी। इतना ही नही रेलवे की ओर से उन्हें एक रिफंड वाउचर दिया गया। बताया गया कि कानपुर स्टेशन पहुंचने पर उन्हें रिफण्ड वाउचर की धनराशि दी जाएगी, लेकिन कोई धनराशि रेलवे की ओर से नही दी गई। सुनवाई के दौरान रेवले की ओर से दायर वाद का विरोध करते हुए कहा गया कि 18 फरवरी वर्ष 2012 को इलाहाबाद से दून आने वाली लिंक एक्सप्रेस ट्रेन में प्रथम एसी और द्वितीय एसी कोच ट्रेन के साथ आवंटित किया गया था जो नही आ सका। जिस कारण प्रथम एसी और द्वितीय एसी कोच में आरक्षित स्थान के यात्रियों के लिए स्लीपर कोच में यात्रा की वैकल्पिक व्यवस्था की गई। स्टेशन पर ही यात्रियों को यह विकल्प दिया गया कि वे अपना रिफंड ले या स्लीपर कोच में यात्रा करें। जिला उपभोक्ता फोरम ने अपने फैसले में कहा कि प्रथम और द्वितीय एसी कोच अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण नही आ पाया। रेलवे विभाग के नियमों के तहत यदि किन्हीं अपरिहार्य कारणों से कोई कोच रद्द हो जाता है तो उसके लिए रेलवे विभाग को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।