देहरादून। राजधानी पुलिस चोरी, ठगी, चेन स्नैचिंग जैसे मामलाें में इस कदर उलझी हुई है कि फरार इनामी बदमाशों की तलाश पर उसका कोई ध्यान नजर नहीं आ रहा। जिले में 33 बदमाश वर्षों से फरार हैं, लेकिन पुलिस उनका कोई सुराग नहीं लगा सकी है। आलम यह है कि 1995 का इनामी भी अब तक पकड़ में नहीं आया है, जबकि वर्ष 2012 में पुष्पा सकलानी हत्याकांड का एक आरोपी भी धरा नहीं जा सका है।
जिले में सबसे पुराना इनाम जसविंदर निवासी लाजपतनगर नई दिल्ली पर है। उस पर वर्ष 1995 में पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। जसविंदर पर कोतवाली क्षेत्र से एक युवती को भगाने का आरोप है। बिहार का राजकुमार और हिमाचल का दीपक उर्फ गोगा 96 से फरार है। 99 में फरार त्रिवेदी दंपति का भी सुराग नहीं लग सका है। 2012 का इनामी ब्रज मोहन उर्फ बिल्ला निवासी लकड़ी मंडी थाना शाहजहांपुर भी फरार है। उस पर ढाई हजार रुपये का इनाम है। हालांकि, जिले में दस हजार रुपये से बड़ा कोई इनामी नहीं है। पुलिस साल दर साल फरार बदमाशों पर इनाम तो घोषित करती रही, लेकिन उनकी धरपकड़ के लिए अब तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका है।
करोड़ों लेकर फरार है दंपति
बसंत विहार निवासी राहुल त्रिवेदी और उसकी पत्नी ऋचा त्रिवेदी करोड़ों रुपये लेकर फरार है। दंपति ने शक्ति सुपर स्टोर खोला था। कम दामों में उच्च क्वालिटी का माल दिलाने का सब्जबाग दिखाकर कई लोगों से करोड़ों रुपये निवेश करा लिए थे। 1999 में रातोंरात दंपति सामान समेटकर निकल गई। दोनों पर दस-दस हजार का इनाम है।
इनामी अपराधियों की धरपकड़ के लिए संबंधित थानों को टास्क दिया जाएगा। थाना स्तर पर होने वाली कार्रवाई की हर सप्ताह सीओ समीक्षा करेंगे।
-केवल खुराना, एसएसपी