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‘गंगा’ और ‘अशोक शिलालेख’ हैं वर्ल्ड हेरिटेज!

Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
Dehradun
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ऋषिकेश। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, दून सर्किल के तत्वावधान में आयोजित विश्व धरोहर सप्ताह सोमवार से विधिवत शुरू हो गया है। बताया कि विभागीय स्तर पर उत्तराखंड राज्य की सांस्कृतिक संपदाओं गंगा और अशोक शिलालेख, कालसी को वर्ल्ड हेरिटेज की संभावित सूची में शामिल करने के प्रयास किए हैं।
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सोमवार को परमार्थ निकेतन गंगा तट पर आयोजित विश्व धरोहर सप्ताह का साध्वी भगवती सरस्वती और यूनेस्को के कार्यक्रम विशेषज्ञ डॉ. रामभुज, स्वामी राघवेंद्रा नंद ने विधिवत उद्घाटन किया। पुरातत्व सर्वेक्षण की 150वीं वर्षगांठ पर डॉ. रामभुज ने कहा कि राज्य में एशिया पेसिफिक स्तर पर वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर की स्थापना के प्रयास किए जाएंगे।
बतौर मुख्य अतिथि साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि देवनदी गंगा के संरक्षण के लिए इसे विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् अतुल भार्गव ने राज्य और देश के ऐतिहासिक अभिलेखों की पृष्ठभूमि और छायाचित्र प्रदर्शनी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
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बताया कि विभागीय स्तर पर गंगा को सांस्कृतिक और प्राकृतिक वर्ल्ड हेरिटेज की मिश्रित श्रेणी के तहत संभावित सूची में शामिल करने के प्रयास किए हैं। प्रदर्शनी के प्रथम दिवस ‘भारत में विश्व धरोहर एवं उत्तराखंड का पुरातात्विक इतिहास’ किताब का विमोचन किया। साथ ही स्कूली बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई।
प्रदर्शनी 25 नवंबर तक चलेगी। कार्यक्रम में आचार्य बैजनाथ शुक्ल, एएसआई के उप अधीक्षण पुरातत्व विद् डीके वर्मा, लिली धस्माना, अशोक कुमार, मनोज जोशी, वाईएस नयाल, राजेंद्र सिंह, डॉ. डीके भार्गव, डॉ. राजीव पांडेय आदि मौजूद थे।
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