देहरादून। भैयादूज पर्व पर भाइयों ने अपनी बहनों से सुख, समृद्धि का आशीष मांगा। परंपरानुसार बहनों ने तिलक कर भाई की लंबी उम्र की कामना की तो भाइयों ने भी उन्हें उपहार दिए। माना जाता है कि इस दिन भाई अपनी बहन (छोटी-बड़ी सभी) के चरण स्पर्श करे तो उसका जीवन खुशहाल बनता है।
भाई को दिया निमंत्रण
गोर्खाली समुदाय की परंपरा के अनुसार भैयादूज से दो दिन पूर्व बहनें भाई के घर जाती हैं। भाई को पान-सुपारी देकर त्योहार पर घर आने का निमंत्रण दिया जाता है। अगर बहन ऐसा नहीं कर पाती तो भाई भी नहीं जाता। बुलावे पर भाई-भाभी बहन के घर जाते हैं। वहां चौखट की पूजा के बाद बहनें भाई को पांच रंगों (लाल, पीला, हरा, नीला, सफेद) का टीका लगाती हैं। इसके बाद फूलमालाएं पहनाई जाती हैं। पुरोहितवाला निवासी मीनू क्षेत्री ने बताया कि पर्व पर फेनी, सेल-रोटी, बटुक आदि पकवान बनाए जाते हैं।
यह है महत्व
उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरतराम तिवारी ने बताया कि भैयादूज पर यम, चित्रगुप्त और यमुना का पूजन किया जाता है। इस दिन भाई बहन के हाथ का बना भोजन करे तो उसकी आयु में वृद्धि और बहन के सौभाग्य की रक्षा होती है। इस दिन मसि पत्र, लेखनी, राजमुद्रा (दवात, कलम और मुहर) की पूजा की जाती है।
खुले रहे स्कूल
मसूर। नगर में भैयादूज का त्योहार श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस दौरान नगर के कान्वेंट और अंग्रेजी माध्यम स्कूल खुले रहे, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।