बेतवा नदी से ट्रैक्टरों पर भरकर लाई जा रही मौरंग।
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शासन के सख्त आदेश के बाद भी रात के अंधेरे में बेतवा और विरमा नदियों से ट्रैक्टर, लोडर व अन्य संसाधनों से मौरंग ढोने का काम जारी है। इसमें पुलिस की मिलीभगत है। वहीं कुछ लोग तो ट्रैक्टरों से दिनदहाड़े मौरंग भर कर ले जाते हैं।
बेतवा नदी से निकलने वाली मौरंग का धंधा कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। कई गांवों के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ भरुआसुमेरपुर तक मंहगे दामों में मौरंग की बिक्री कर रहे हैं। कुछ लोग तो बैलगाड़ी व तांगों पर मौरंग ढो रहे हैं। यहां तक रिक्शों और साइकिलों से मौरंग ढोई जा रही है। शाम ढलते ही अंधेरे में अवैध ट्रैक्टर नदी की तरफ दौड़ने लगते हैं।
पिछले साल मौरंग के अभाव में शौचालय निर्माण का कार्य अधर में लटकने पर प्रशासन ने गरीबों को बैलगाड़ी, रिक्शा, साइकिल से मौरंग लाने की मौखिक तौर पर छूट दी थी। यह काम धीरे-धीरे लघु उद्योग का रूप ले चुका है। पुलिस इन लोगों को घुड़की देती रहती है। वहीं ट्रैक्टरों व लोडर मालिकों से साठगांठ कर अवैध धंधे में छूट दिए है। लोगों का कहना है रात दिन चलने वाले इन ट्रैक्टर व लोडर को कोई अधिकारी और न पुलिस पकड़ रही है।
ट्रैक्टरों के जरिये हो रहे अवैध कारोबार को लेकर झगड़ेे भी हो रहे हैं। तीन दिन पूर्व रूरीपारा में विरमा नदी से मौरंग निकालकर ले जाने के मामले में फायरिंग की घटना हो चुकी है। ललपुरा एसओ संजीव कुमार का कहना है कि अवैध मौरंग रोकना उनका काम नहीं है। राजस्व विभाग को इसके लिए लगाया गया है। अगर कहीं कोई झगड़ा कर कानून व्यवस्था खराब करेगा तो वह कार्रवाई करेंगे।