चर्चित डॉ. डीडी त्रिपाठी हत्याकांड के आरोपी ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा तथा उनके भाई जीत नारायण मिश्र को फास्ट ट्रैैक कोर्ट के न्यायाधीश देवकांत शुक्ल की अदालत ने सोमवार को सुनवाई के दौरान संदेह का लाभ देते हुए हत्याकांड से दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपियों को हत्याकांड दोष सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया।
अभियोजन अनुसार कटरा कोतवाली क्षेत्र के लालडिग्गी स्थित डॉ. डीडी त्रिपाठी की उनके ही निजी चिकित्सालय पर 25 मई 1980 को साढ़े आठ बजे रात गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। उनके पिता महावीर त्रिपाठी ने उसी दिन कटरा कोतवाली में दस बजे रात सात अज्ञात लोगों पर उनके बेटे के क्लीनिक में बलवा करने और गोली मारकर हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना की। विवेचना के दौरान चार लोगों का नाम प्रकाश में आया, जिसमें रामचंद्र पुत्र लालसाहब, हैदर अली, विजय कुमार मिश्र व जीत नारायण मिश्र आरोपी बनाया गया।
चार फरवरी 1981 को अतिरिक्त न्यायाधीश की अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया गया कि हत्याकांड के दिन रामचंद्र और हैदरअली किसी मामले में कानपुर जेल में बंद थे। इसके आधार पर कोर्ट ने इनका नाम हत्याकांड बाहर कर दिया। विजय मिश्रा व जीत नारायण मिश्रा के खिलाफ न्यायालय द्वारा सुनवाई की गई।
अभियोजन की ओर से अभियोजन पीओ सीबी सीआईडी वाराणसी द्वारा डा. डीडी त्रिपाठी के परिवार इंदुधर त्रिपाठी, पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी तथा चंद्रधर त्रिपाठी सहित नौ गवाह को कोर्ट में प्रस्तुत कोर्ट में प्रस्तुत किया। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता प्यारेलाल अग्रवाल तथा बिहार प्रसाद सिंह ने आरोपियों का पक्ष रखा। अधिवक्ताओं की दलील, पत्रावली में दिए साक्ष्य तथा गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने सोमवार को ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा तथा उनके भाई जीत नारायण मिश्र को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।