आप कह सकते हैं कि भारत के पास ऋषभ पंत के तौर पर एक एक्स फैक्टर वाला खिलाड़ी मौजूद है जो किसी भी मुश्किल हालात में कहीं से भी अटपटे अंदाज में टेस्ट मैच का रुख बदल देता है। लेकिन, न्यूजीलैंड के पास भी तो बीजे वॉटलिंग हैं जो पूराने शैली में गंभीर होकर बल्लेबाजी करते हैं लेकिन पंत की ही तरह प्रभावशाली रहें हैं अपनी टीम के लिए मैच बचाने या फिर जिताने में। ठीक इसी तरह कोहली के सामने आपको विलियमसन का रुतबा टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर हल्का नजर आए लेकिन हकीकत यही है जो फर्क एक जमाने में सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा के बीच टेस्ट मैच में हुआ करता था वही फर्क इन दोनों के बीच में है। मतलब कहने का ये है कि ज्यादा फर्क बिल्कुल नहीं है। तो यहां पर भी मामला बराबरी का ही दिख रहा है।
भारत की जीत को लेकर हर कोई पूरी तरह से आश्वस्त नहीं
मगर, टीम इंडिया को अगर परेशानी किसी एक बात से होगी तो वो ये कि उनके अहम बल्लेबाजों का इंग्लैंड में अब तक का इतिहास। रोहित शर्मा वैसे भी विदेशी पिचों पर नाकाम रहते हैं लेकिन चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्या रहाणे का इंग्लैंड की सरजमीं पर 30 से कम का औसत कोहली के मन में संदेह डालने के लिए काफी होगा। शायद, ये पहला मौका है जब कीवी टीम को एक अहम फाइनल में हल्का नहीं आंका जा रहा है और भारत की जीत की दावेदारी को लेकर हर कोई पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है।
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