फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

WTC FINAL: लंबा सफर तय करने के बाद किस टीम के पास बेहतर मौका चैंपियन बनने का?

सार

टेस्ट क्रिकेट के करीब 150 साल के इतिहास में पहली बार विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल का आयोजन हो रहा है और उसमें दो ऐसी टीमों ने फाइनल में जगह बनाई है, जिन्हें पारंपारिक तौर पर कभी भी चैंपियन टेस्ट टीम के तौर पर नहीं देखा गया।
विज्ञापन
भारतीय टीम - फोटो : social media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आम-तौर पर टेस्ट मैच में किसी एक टीम को मजबूत और दूसरे को थोड़ा कमजोर कहने में बहुत ज्यादा हिचकिचाहट नहीं होती है। लेकिन, टेस्ट क्रिकेट के करीब 150 साल के इतिहास में पहली बार विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल का आयोजन हो रहा है और उसमें दो ऐसी टीमों ने फाइनल में जगह बनाई है, जिन्हें पारंपारिक तौर पर कभी भी चैंपियन टेस्ट टीम के तौर पर नहीं देखा गया। कप्तान के तौर पर असाधारण कामयाबी हासिल करने वाले महेंद्र सिंह धोनी को भी लाल गेंद की क्रिकेट में आलोचना के दौर से गुजरना पड़ा। विराट कोहली की अगुवाई में पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम ने दिखाया कि वो घर के साथ साथ विदेश में भी टेस्ट मैच जीतने का माद्दा रखते हैं।

विज्ञापन


क्या है दोनों टीमों की असली ताकत
कुछ ऐसा ही सफर इत्तेफाक से न्यूजीलैंड टीम का भी रहा है। इन्हें भी कभी भी टेस्ट क्रिकेट की उम्दा टीमों में नहीं आंका जाता है लेकिन पिछले कुछ सालों में इन्होंने भी इतना शानदार खेल दिखाया कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे मुल्क जो खुद को बिग ब्रदर्स मानते हैं, उन्हें फाइनल में पहुंचने तक नहीं दिया। भारत की ही तरह न्यूजीलैंड की कामयाबी की वजह उनका लाजवाब गेंदबाजी आक्रमण है जिसने उन्हें इस मोड़ पर पहुंचाया है। अगर टीम इंडिया के पास जसप्रीत बुमराह हैं तो न्यूजीलैंड के पास टिम साउथी, कोहली के पास इशांत शर्मा हैं तो विलियमसन के पास ट्रेंट बोल्ट, भारत के पास मोहम्मद शमी हैं तो कीवी के पास मैट हेनरी। कुल मिलाकर आप समझ ही गए होंगे कि दोनों टीमों की असली ताकत इनकी गेंदबाजी आक्रमण और खास तौर पर स्विंग और तेज गेंदबाज हैं, जो इंग्लैंड में काफी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। 

अश्विन और जडेजा की जोड़ी कोहली को एक खास लाभ देती है
वैसे भी पूरानी कहावत है कि अगर टेस्ट मैच जीतना है तो 20 विकेट लेने वाला आक्रमण होना चाहिए ना कि दोहरे शतक का अंबार लगाने वाले बल्लेबाजी क्रम। तो क्या मामला इस लिहाज से पूरी तरह से फिफ्टी फिफ्टी है? जी नहीं। अगर सिर्फ गेंदबाजी आक्रमण में विविधता की बात करें तो स्पिन गेंदबाजों के अनुभव के चलते रविचंद्रण अश्विन और रविंद्र जडेजा की जोड़ी कोहली को एक खास लाभ देती है। कम से कम कागज पर ही सही। दोनों ने मिलकर टेस्ट क्रिकेट में करीब 650 विकेट लिए हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

टेस्ट मैच का रुख बदल देता है पंत

ऋषभ पंत - फोटो : social media
आप कह सकते हैं कि भारत के पास ऋषभ पंत के तौर पर एक एक्स फैक्टर वाला खिलाड़ी मौजूद है जो किसी भी मुश्किल हालात में कहीं से भी अटपटे अंदाज में टेस्ट मैच का रुख बदल देता है। लेकिन, न्यूजीलैंड के पास भी तो बीजे वॉटलिंग हैं जो पूराने शैली में गंभीर होकर बल्लेबाजी करते हैं लेकिन पंत की ही तरह प्रभावशाली रहें हैं अपनी टीम के लिए मैच बचाने या फिर जिताने में। ठीक इसी तरह कोहली के सामने आपको विलियमसन का रुतबा टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर हल्का नजर आए लेकिन हकीकत यही है जो फर्क एक जमाने में सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा के बीच टेस्ट मैच में हुआ करता था वही फर्क इन दोनों के बीच में है। मतलब कहने का ये है कि ज्यादा फर्क बिल्कुल नहीं है। तो यहां पर भी मामला बराबरी का ही दिख रहा है।

भारत की जीत को लेकर हर कोई पूरी तरह से आश्वस्त नहीं 
मगर, टीम इंडिया को अगर परेशानी किसी एक बात से होगी तो वो ये कि उनके अहम बल्लेबाजों का इंग्लैंड में अब तक का इतिहास। रोहित शर्मा वैसे भी विदेशी पिचों पर नाकाम रहते हैं लेकिन चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्या रहाणे का इंग्लैंड की सरजमीं पर 30 से कम का औसत कोहली के मन में संदेह डालने के लिए काफी होगा।  शायद, ये पहला मौका है जब कीवी टीम को एक अहम फाइनल में हल्का नहीं आंका जा रहा है और भारत की जीत की दावेदारी को लेकर हर कोई पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें