भारत की स्टार सलामी बल्लेबाज और उपकप्तान को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) ने 3.4 करोड़ रुपये में खरीदा था और कप्तान नियुक्त किया था। मंधाना को खरीदने के लिए कई टीमों के बीच बोली लगी थी। हालांकि, आरसीबी ने लगातार बोली लगाई और सबसे महंगी बोली लगाकर मंधाना को अपनी टीम में शामिल किया। हालांकि, आरसीबी का प्रदर्शन पिछले सीजन कुछ खास नहीं रहा था।
ऑस्ट्रेलिया की यह खिलाड़ी दुनिया के शीर्ष ऑलराउंडर्स में से एक है। गुजरात जाएंट्स ने अपने बल्लेबाजी लाइनअप में अनुभव डालने के लिए इस ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज को खरीदा था, जो जरूरत की हिसाब से खेलने में माहिर है। गार्डनर की खास बात यह है कि वह किसी भी समय किसी भी गेंदबाज को चौके-छक्के लगा सकती हैं। गुजरात की तरह अन्य फ्रेंचाइजी भी गार्डनर को अपनी टीम में शामिल करने के लिए बेताब थीं। उन पर एक बार बोली लगाने की जंग शुरू होने के बाद यह 3.2 करोड़ रुपये पर जाकर रुकी।
इंग्लैंड की इस ऑलराउंडर की क्षमताओं पर किसी को भी शक नहीं है। मुंबई को मध्यक्रम में तूफानी बल्लेबाजी करने के साथ-साथ एक बेहतर बॉलिंग ऑप्शन की जरूरत थी और नेट शिवर से बेहतर कोई नहीं हो सकता था। गार्डनर को नहीं खरीद पाने के बाद मुंबई ने शिवर पर जमकर पैसे लुटाए और उन्हें नीलामी में 3.2 करोड़ रुपये में खरीदा।
यह सभी को पता था कि भारत की सबसे विस्फोटक बल्लेबाज शैफाली पर अच्छी बोली लगने वाली थी। दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें खरीदने के लिए एड़ी चोटी की जान लगाई और उन्हें 2.6 करोड़ रुपये में खरीद लिया। शैफाली ने पिछले सीजन कई आक्रामक पारियां भी खेली थीं, जिसकी वजह से दिल्ली फाइनल में पहुंची थी।
शैफाली के अलावा दिल्ली को मध्यक्रम में एक भरोसेमंद बल्लेबाज की जरूरत थी। जेमिमा मौजूदा समय में भारतीय मध्यक्रम में सबसे शानदार बल्लेबाज हैं और साथ ही एक चुस्त फील्डर भी हैं। ऐस में कैपिटल्स ने उनकी बल्लेबाजी और फील्डिंग की सेवाएं लेने के लिए 2.2 करोड़ रुपये खर्च किए। जेमिमा भविष्य में दिल्ली की कप्तानी भी करती हुई दिखाई पड़ सकती हैं। फिलहाल दिल्ली की कप्तानी मेग लैनिंग के हाथों में है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि महिला प्रीमियर लीग 2024 नीलामी में खरीदा जाने वाला सबसे महंगा क्रिकेटर कौन बनता है। वेदा कृष्णमूर्ति, किम गार्थ, डियांड्रा डॉटिन, एनबेल सदरलैंड या चामरी अटापट्टू समेत ऑक्शन पूल में कई बड़े सितारे हैं। हालांकि, पर्स में ज्यादा राशि नहीं बची है। ऐसे में टीमें सूझबूझ के साथ फैसला कर सकती हैं।