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सुशील दोशी की कलम से: अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की बोलती बंद की, ये चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचने की दावेदार

सार

अफगानिस्तान से हारने के बाद पाकिस्तान की हालत खराब नजर आ रही है। टीम सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए भी जूझ रही है। अफगानिस्तान की जीत पर मशहूर कमेंटेटर सुशील दोशी ने अपनी राय रखी है। आइए जानते हैं...
 
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सुशील दोशी की कलम से - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नमस्कार! मैं सुशील दोशी फिर से एक बार आपका स्वागत करता हूं। विश्व कप 2023 के मुकाबले लगातार बेहतर होते जा रहे हैं और रोमांच बढ़ता जा रहा है। छोटी-छोटी टीमें बड़ी-बड़ी टीमों को पराजित कर रही हैं। देखिए हम कल तक कह रहे थे कि अफगानिस्तान क्रिकेट खेल का एक तरह से बच्चा ही है, अभी नवोदित है और क्रिकेट खेलना अभी सीख ही रहा है, लेकिन सोमवार के मैच के बाद यह कहना पड़ेगा कि ये बच्चा तो अब बड़े-बड़ों को आंखें दिखा रहा है।
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हमें मालूम है कि जिस तरह से अफगानिस्तान ने पुराने चैंपियन इंग्लैंड को पराजित किया था, उसने सभी को चौंका दिया था और अब एशिया के पावरहाउस पाकिस्तान को जिस तरीके से उन्होंने पराजित किया, उसने लोगों की आंखें खोल दी हैं कि ये बच्चा अब दरअसल परिपक्व हो गया है और बड़ी-बड़ी टीमों को ये पराजित कर सकता है।

पाकिस्तान की एक तरह से बोलती ही बंद हो गई, क्योंकि वहां बातें ज्यादा हो रही हैं और काम कम हो रहा है और उनके खिलाड़ी वैसा प्रदर्शन कर नहीं पा रहे हैं, जिन अपेक्षाओं के साथ वे भारत आए थे। उनके तेज गेंदबाजों के बारे में कहा जा रहा था कि पाकिस्तान का तेज गेंदबाजी आक्रमण दुनिया के सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाजी आक्रमणों में से एक है। हालांकि, वह भारतीय पिचों पर बिल्कुल फिसड्डी रहे।
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मनोवैज्ञानिक दबाव उन पर इस तरह पड़ा है कि वे बेहद मामूली प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रभावित करने में बिल्कुल भी सफल नहीं हो रहे हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ जिस तरीके से उन्हें आठ विकेट से हार मिली, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से इस तरह से हारना सोचा भी नहीं था। मैं हमेशा कहा करता हूं कि किसी भी देश के खिलाड़ियों का प्रदर्शन उस देश के हालातों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

पाकिस्तान में जो ऊहापोह की स्थिति है, जो खलबली मची हुई है और जिस तरह से अव्यवस्थित वातावरण है, वही बात उनके क्रिकेट में भी देखने को मिल रही है। उनका क्रिकेट बहुत ही मामूली नजर आ रहा है। न इमरान खान जैसा ऑलराउंडर, न उनके जैसा नेतृत्व और न ही शाहिद अफरीदी जैसे मारक खिलाड़ी जिनमें फायर पावर जबरदस्त था।

अब तो यह टीम बहुत ही मामूली लगती है और लगता है कि सेमीफाइनल से लगभग बाहर हो गए हैं। जो चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचने की दावेदार लग रही हैं- भारत, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया। मुझे लगता है कि ये चुनौतियां जबरदस्त होंगी। भारत को सावधान रहना होगा। अब तक टीम इंडिया ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

देखिए कई बार क्या होता है कि आप जल्दी चरम पर पहुंच जाते हैं जल्दी अपना पीक स्तर हासिल कर लेते हैं। वहां पर अपना स्थान कायम रखना बहुत जरूरी है। वही ऊर्जा कायम रखना और वही आक्रामक तरीका आपको कायम रखना होगा। चयनकर्ताओं को भी जागना होगा। 11 मजबूत खिलाड़ियों की टीम उतारनी होगी और देश हित सर्वोपरि मानना होगा।

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए बहुत अच्छा मौका है। 1983 में वनडे का विश्व कप जीता था, उसके बाद 2011 में जीता और एक बार फिर से वह मौका आ गया है जब भारतीय टीम बहुत ही शक्तिशाली और बहुत ही ताकतवर नजर आ रही है, बहुत ही संतुलित नजर आ रही है। भारतीय वातावरण में मैच हो रहे हैं और भारत यह विश्व कप जीत सकता है।

इसी उम्मीद के साथ मैं आप सब को शुभकामनाएं देता हूं और साथ ही मेरे मित्र बिशन सिंह बेदी, जिनके साथ मैंने कई दौरे किए। ऑस्ट्रेलिया गया, पाकिस्तान गया और इंग्लैंड में मैंने उनकी बॉलिंग को देखा। मेरे साथ उन्होंने माइक्रोफोन भी शेयर किया है, लेकिन आज वो नहीं रहे। उनके बारे में जो खबर आई है, यह बहुत ही दुखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। 
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