अमर उजाला संवाद में सोमवार को पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने अपने मुख्य कोच बनने की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि वह भारतीय टीम के मुख्य कोच के रूप में तो नजर नहीं आएंगे, लेकिन अगर उन्हें आईपीएल में किसी टीम के लिए मौका मिला तो वह इस भूमिका को निभाना चाहेंगे।
सवाल: क्या आपको आईपीएल में या फिर भारतीय टीम के कोच के तौर पर देखेंगे?
जवाब: मुझे लगता है कि भारतीय टीम के लिए तो नहीं, लेकिन आईपीएल टीम के लिए किसी के लिए मौका आता है तो जरूर मैं देख सकता हूं। क्योंकि मैं भारतीय टीम का कोच बनता हूं तो वापस से वही रुटीन होगी जो मैंने 15 साल में किया है। 15 साल आप भारतीय टीम के लिए खेले, साल में आठ महीने घर से बाहर रहे। अभी मेरे बच्चे 14 और 16 साल के हैं और उन्हें मेरी जरूरत है। दोनों क्रिकेट खेलते हैं। एक ऑफ स्पिनर है और एक ओपनिंग बल्लेबाज है। उन्हें क्रिकेट सिखानी है और खिलानी है। उनके साथ समय बिताना है। अगर मैं भारतीय टीम का कोच बनता हूं तो टीम इंडिया के खिलाड़ी आठ महीने बाहर रहते हैं तो ये मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती हो जाएगी। फिर मैं अपना समय बच्चों को नहीं दे पाऊंगा। लेकिन हां अगर आईपीएल में किसी कोच की या मेंटर का रोल मुझे मिलता है तो जरूर मैं इस पर सोचूंगा।
पिछले कुछ दिनों में भारतीय खिलाड़ियों को स्पिनर्स के खिलाफ संघर्ष करते देखा गया है। इसका ताजा उदाहरण श्रीलंका दौरे पर देखने को मिला था। इस मुद्दे पर भी सहवाग ने खुलकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इसका एक कारण यह है कि जितनी व्हाइट बॉल क्रिकेट ज्यादा होगी, उतने स्पिनर्स कम आएंगे, क्योंकि टी20 क्रिकेट में आप 24 गेंद डालते हो फ्लाइट नहीं करते हो, तो आपके अंदर स्किल नहीं आती कि आप बल्लेबाज को आउट कर सको।
सवाल: भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स को बहुत अच्छा खेलते थे। एक समय भारतीय बल्लेबाजों को स्पिनर्स के खिलाफ सबसे मजबूत माना जाता था, लेकिन हालिया दिनों में देखा गया कि भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स को अच्छा नहीं खेल पा रहे और उनके सामने बेबस नजर आते?
जवाब: इसका एक कारण यह है कि जितनी व्हाइट बॉल क्रिकेट ज्यादा होगी, उतने स्पिनर्स कम आएंगे, क्योंकि टी20 क्रिकेट में आप 24 गेंद डालते हो फ्लाइट नहीं करते हो, तो आपके अंदर स्किल नहीं आती कि आप बल्लेबाज को आउट कर सको। मुझे लगता कि वो एक कारण हो सकता है। भारतीय खिलाड़ी डोमैस्टिक क्रिकेट भी कम खेलते हैं। डोमैस्टिक क्रिकेट में आपको ज्यादा स्पिन खेलने को मिलती बजाय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के। तो वो भी एक कारण हो सकता है। मुझे लगता है कि क्वालिटी स्पिनर हैं नहीं भारत में अभी जिनको मैं देख रहा हूं कि वो फ्लाइट अच्छी करते हैं और विकेट ले सकें। हमारे समय में द्रविड़, सचिन, गांगुली, लक्ष्मण, युवराज, हम सभी डोमैस्टिक क्रिकेट भी खेलते थे, चाहे वह वनडे खेलें या फोर डे खेलें तो काफी डोमैस्टिक क्रिकेट खेलते थे। उसमें हम काफी स्पिनरों को खेलते थे, लेकिन आज के व्यस्त कार्यक्रम में खिलाड़ियों को समय कम मिल रहा है। अलग अलग लीग हैं, जिसकी वजह से खिलाड़ी के स्पिन को खेलने की स्किल डेवलप नहीं हो पा रही।