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SC: प्रवासी श्रमिकों के लिए राशन कार्ड पर 2021 के फैसले के अनुपालन के बारे में बताए सरकार; कोर्ट का निर्देश

Mon, 02 Sep 2024 01:59 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से प्रवासी श्रमिकों के लिए कल्याणकारी उपायों पर 2021 के फैसले के अनुपालन के बारे में जानकारी देने को कहा है। बता दें कि शीर्ष अदालत ने 29 जून, 2021 के फैसले और उसके बाद के आदेशों में अधिकारियों को कई निर्देश पारित किए थे। इसमें अधिकारियों से कोरोना महामारी के दौरान 'ई-श्रम' पोर्टल पर रजिस्टर पीड़ित प्रवासी श्रमिकों को राशन कार्ड देना शामिल था। 

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न्यायाधीश सीटी रविकुमार और संजय करोल की पीठ ने केंद्र से जानकारी मांगते हुए कहा कि भारत संघ को 29 जून, 2021 के फैसले और उसके बाद के अन्य आदेशों के अनुपालन में उठाए गए कदमों के बारे में बताते हुए एक व्यापक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है। इस तरह के हलफनामे में मुख्य निर्णय और उसके बाद के आदेशों के माध्यम से जारी किसी भी निर्देश पर उठाए गए कदमों का पूरा विवरण शामिल किया जाना चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने इसके लिए तीन सप्ताह का समय दिया था।  

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने प्रवासी श्रमिकों के लिए कल्याणकारी उपायों की मांग करने वाले तीन कार्यकर्ताओं की याचिका पर अधिकारियों को कई निर्देश जारी किए थे। शीर्ष कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आदेश दिया था कि जब तक कोविड महामारी रहेगी तब तक उन्हें मुफ्त सूखा राशन उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं तैयार की जाएं।  
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इससे पहले मामले में सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि प्रवासी श्रमिक राष्ट्र के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। मामले में केंद्र से एक तंत्र तैयार करने को भी कहा था ताकि उन्हें बिना राशन कार्ड के खाद्यान्न प्राप्त हो सके।

सुप्रीम कोर्ट ने वकील को कहा- पहले कलकत्ता HC जाएं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की एक वकील की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसने आरोप लगाया था कि राज्य और उसकी पुलिस के खिलाफ याचिका दायर करने के बाद टीएमसी सरकार की तरफ से उसे निशाना बनाया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि वह स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेताओं की तरफ से कथित तौर पर संदेशखली में महिलाओं के खिलाफ अपराध और जमीन हड़पने के आरोपों से संबंधित मामले में कुछ पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रही थी। उसने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ झूठे मामले थोपे गए हैं, उसने इन मामलों को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की। न्यायमूर्ति बी आर गवई और के वी विश्वनाथन की पीठ ने उसे अपनी शिकायतों के साथ कलकत्ता उच्च न्यायालय जाने को कहा है।
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केरल के दो जजों को सुप्रीम कोर्ट से झटका

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दो जिला न्यायालय के न्यायाधीशों की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि केरल उच्च न्यायालय के कॉलेजियम की तरफ से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनके नामों पर विचार नहीं किया गया। न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा, यह किस तरह की याचिका है... वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर उच्च न्यायालय के कॉलेजियम की तरफ से विचार नहीं किया जा रहा है। यह याचिका जिला न्यायालय के न्यायाधीशों सादिया अल्वी पीपी और केटी निसार अहमद की तरफ से दायर की गई थी। पीठ ने न्यायिक अधिकारियों को अन्य उपाय करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा, हमने आपको वापस लेने की अनुमति दी है, हम स्वतंत्रता नहीं दे रहे हैं। अन्यथा, बर्खास्तगी का आदेश लें। पीठ के मूड को भांपते हुए, उनके वकील ने याचिका वापस ले ली।
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