तीसरे नंबर पर अजिंक्य रहाणे हैं, जिन्होंने कुल चार मैच मिस किए हैं। रहाणे इंग्लैंड के भारत दौरे के दौरान चोट के चलते दो मैच नहीं खेल पाए थे, वहीं साउथ अफ्रीका दौरे के पहले दो मैचों से उन्हें ड्रॉप किया गया था। ऋद्धिमान साहा ने अभी तक चोट के कारण 8 मैच मिस किए हैं। कोहली की टीम में वह इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्हें ड्रॉप नहीं किया गया।
टॉप 5 में पांचवां नंबर है चेतेश्वर पुजारा का, जो कोहली की कप्तानी में खेले गए 37 में से 31 मैचों में नहीं खेले हैं। वेबसाइट ने टीम में लगातार बदलाव पर आंकड़ों के लिहाज से समझाया है कि कोहली की कप्तानी में खेले 36 मैचों में से भारत को 21 में जीत मिली है जबकि छह में भारत हारा है, वहीं नौ मैच ड्रॉ रहे हैं। हालांकि ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो दुनिया की चोटी की टीमों ने अपने लाइनअप में ज्यादा बदलाव नहीं किए हैं। ऑस्ट्रेलिया की टीम ने अक्टूबर 1999 से मार्च 2001 के बीच लगातार 16 टेस्ट मैच जीते। इस टीम में चार खिलाड़ी ऐसे थे जो हर मैच खेले।
ये खिलाड़ी थे - माइकल स्लेटर, मार्क वॉ, जस्टिन लेंगर और ग्लेन मैक्ग्रा वहीं स्टीव वॉ और एडम गिलक्त्रिस्स्ट ने सिर्फ एक मैच मिस किया। वेस्ट इंडीज की दिग्गज टीम जो 1982 से 1984 के बीच 27 टेस्ट मैचों तक अजेय रही में भी चार खिलाड़ी, विवियन रिचर्ड्स, गोर्डन ग्रीनिच, डेसमंड हेंस और ल्यू जोंस हर मैच खेले। क्लाइव लॉयड ने सिर्फ एक मैच मिस किया।
टीम में लगातार बदलाव को परिस्थितिजन्य बताया जाता है। यानी जैसे हालात वैसी टीम। अगर इन पर नजर डालें तो कोहली की कप्तानी के 37 मैचों में से भारत ने 11 मैच ही भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर खेले हैं। इसमें से ऑस्ट्रेलिया में दो, वेस्ट इंडीज में चार, साउथ अफ्रीका में तीन और इंग्लैंड में अब तक दो मैच खेले हैं।
कोहली की बड़ी चुनौती यह है कि भारत के अगले 10 टेस्ट में से सात एशिया के बाहर होने हैं। और यहीं एक कप्तान के तौर पर उनकी असली परीक्षा होगी। इंग्लैंड के बाद भारत को इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया का दौरा करना है और अब सवाल यही है कि क्या कोहली का हर मैच में नई टीम के साथ उतरने का सिलसिला जारी रहेगा?