पूरे विजय हजारे ट्रॉफी में अपने बल्ले से रन बरसाने वाले
मयंक अग्रवाल का बल्ला फाइनल में सौराष्ट्र के खिलाफ भी चला और उनके 90 रनों की पारी की बदौतल कर्नाटक इस टूर्नामेंट का चैंपियन बना। दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेले गए फाइनल मुकाबले में कर्नाटक ने सौराष्ट्र को 41 रन से मात देने में कामयाब रही।
सौराष्ट्र के कप्तान
चेतेश्वर पुजारा ने पहले फील्डिंग का फैसला किया। इसके जवाब में कर्नाटक की शुरुआत बेहद खराब रही और दूसरे ही ओवर में कप्तान करुण नायर अपना खाता खोले बिना ही पवेलियन लौट गए। इसके बाद आए
के एल राहुल भी शून्य के स्कोर पर रन आउट हुए।
दो विकेट जल्दी गिर जाने के बाद पूरी सीरीज में अपने बल्ले से धूम मचाने वाले मयंक अग्रवाल और रवि कुमार समर्थ के बीच चौथए विकेट लिए 136 रन की साझेदारी हुई। शतक की ओर बढ़ रहे अग्रवाल को जयदेव उनाडकट ने जडेजा के हाथों कैट आउट करवाया। उन्होंने 79 बॉल पर 11 चौके और 3 छक्कों की मदद से 90 रन बनाए।
अग्रवाल के आउट होने के बाद समर्थ 48 और पवण देशपांडे ने 49 रन की पारी खेलकर आउट हुए। इसके बाद कोई भी बल्लेबाज देर तक टिकने में कामयाब नहीं रहा। पूरी टीम 45.5 ओवर में 253 रन बनाकर ढेर हो गई।
सौराष्ट्र के लिए कमलेश मकवाना ने 8.5 ओवर में 34 रन देकर 4 लिए। इसके अलावा मंकद ने 2, जबकि जडेजा और शौर्य सानंदिया ने संयुक्त रूप से एक-एक विकेट झटका।
254 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सौराष्ट्र की आधी टीम महज 100 रन के भीतर ही पवेलियन लौट चुकी थी। हालांकि एक ओर से कप्तान पुजारा लगातार संघर्ष करते रहे लेकिन 94 रन के निजी स्कोर पर वह रन आउट हो गए। पूरी पारी में सौराष्ट्र लगातार अंतराल में अपने विकेट गंवाता रहा और पूरी टीम 46.3 ओवर में 212 रन बनाकर ऑल आउट हो गई।
कर्नाटक की ओर से तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा और स्पिनर कृष्णप्पा गौतम ने 3-3 विकेट झटके। इसके अलावा रोजर बिन्नी और देशपांडे को एक-एक विकेट मिला। मयंक अग्रवाल को उनके 90 रनों की पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया।