आईसीसी के किसी वर्ल्ड कप में 32 साल से भी लंबे समय बाद पहली बार भारत और विंडीज की टीमें आमने-सामने थीं लेकिन टीम इंडिया इस बार अपने इस पुराने प्रतिद्वंद्वी को हरा पाने में नाकाम रही जिससे उसका खिताबी चौका लगाने का सपना अधूरा रह गया।
1983 में आखिरी बार दोनों टीमें लॉर्ड्स में एक-दूसरे के खिलाफ उतरी थी जिसमें कपिल देव की कप्तानी में भारत विजयी हुआ था, लेकिन इस बार कैरेबियाई टीम के जूनियर खिलाड़ियों ने बरसों पुराने हार का बदला ले ही लिया।
मीरपुर में खेले गए खिताबी जंग में ही भारतीय बल्लेबाज अचानक लड़खड़ा गई जिससे उसकी पूरी टीम 45.1 ओवर में ही 145 रन पर आउट हो गई। उसकी ओर से फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज सरफराज खान ने सबसे बड़ी पारी खेली। उन्होंने टूर्नामेंट में अपना पांचवां अर्धशतक लगाते हुए 51 रनों का योगदान दिया।
जवाब में भारतीय गेंदबाजों ने बेहद कसी हुई गेंदबाजी की और कैरेबियाई बल्लेबाजों को एक-एक रन बनाने के लिए तरसा दिया लेकिन छोटे से लक्ष्य को उन्होंने संघर्ष करते हुए 3 गेंद शेष रहते हासिल कर ही लिया। भारत ने 77 रन पर उसके 5 विकेट झटक लिए थे लेकिन छठे विकेट के लिए कैसी कार्टी (52) और कीमो पॉल (39) ने साहसिक बल्लेबाजी करते हुए 69 रनों की अविजित साझेदारी कर उसकी जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। विंडीज ने अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर चौका लगाकर 5 विकेट से मैच जीत लिया। फिरकी गेंदबाज मयंक डागर ने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके।
राहुल द्रविड़ की कोचिंग में भारत का चौथा वर्ल्ड कप जीतने का ख्वाब टूट गया। पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही टीम इंडिया फाइनल में ही हार गई। भारत ने 2000 और 2008 के बाद आखिरी बार 2012 में इस प्रतिष्ठित खिताब को अपने नाम किया था।
टीम इंडिया ने श्रीलंका को हराकर फाइनल में प्रवेश किया, वहीं वेस्टइंडीज ने मेजबान बांग्लादेश को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। वेस्टइंडीज की टीम दूसरी बार खिताबी मुकाबले में पहुंची और पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया।