अगर समय पर भारत सरकार की मंजूरी मिल गई तो अमेरिका की तरह भारत भी गुरुत्वाकर्षण तरंगों की आवाज सुन सकता था। अमेरिका के इन तरंगों को सुनने में भारतीय संस्थानों जैसे रमण रिसर्च इंस्टीट्यूट, बंगलूरू सहित कई अन्य संस्थानों का सीधा योगदान रहा है।
अमेरिका के बाहर पहले और दुनिया के तीसरे ऐसे डिक्टेटर को भारत में स्थापित करने की योजना सरकार के पास 2011 से लंबित है। अगर भारत सरकार ने इस पर तुरंत निर्णय लिया होता तो गुरुत्वाकर्षण तरंगों की आवाज भारत भी सुन सकता था।
2014 संप्रग सरकार के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इस योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी लेकिन इस बड़ी वैज्ञानिक परियोजना के लिए फंड का आवंटन करने में विफल रही थी।