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Team India: क्या रोहित ने कभी यो-यो टेस्ट पास किया? भारतीय कोच का यह जवाब जीत लेगा आपका दिल, कोहली से की तुलना

Mon, 11 Dec 2023 01:19 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बीसीसीआई ने हाल के वर्षों में फिजिकल फिटनेस को भारतीय टीम में चयन के लिए जरूरी मानदंड बनाया है। इसके साथ ही यो-यो टेस्ट की शुरुआत ने खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस पर काम करने के लिए मजबूर कर दिया है।
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विराट कोहली और रोहित शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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विराट कोहली के भारतीय टीम में आने के बाद से भारतीय क्रिकेट का पूरा नक्शा ही पलट गया। वह ऐसे कि पहले फिटनेस भारतीय टीम में चयन का जरूरी मानदंड नहीं था, लेकिन क्रिकेट के विकास और विराट के इस खेल में एंट्री के साथ बहुत कुछ बदल गया है। विराट कोहली यकीनन आज किसी भी युवा के लिए फिटनेस के सबसे बेहतरीन उदाहरण हैं, लेकिन बाकी भारतीय खिलाड़ी भी इस मामले में कहीं से पीछे नहीं हैं।
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रोहित की फिटनेस कैसी है?

बीसीसीआई ने हाल के वर्षों में फिजिकल फिटनेस को भारतीय टीम में चयन के लिए जरूरी मानदंड बनाया है। इसके साथ ही यो-यो टेस्ट की शुरुआत ने खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस पर काम करने के लिए मजबूर कर दिया है। हालांकि, रोहित शर्मा की फिटनेस को लेकर भी लगातार बातचीत जारी रहती है। कुछ फैंस उन्हें अनफिट बताते हैं तो कुछ कहते हैं कि अगर वह फिट नहीं होते तो राष्ट्रीय टीम में नहीं खेल रहे होते। हालांकि, जहां तक भारत के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच अंकित कलियार का सवाल है, रोहित कोहली की तरह ही फिट और चुस्त हैं।

भारतीय कोच ने क्या कहा?

अंकित ने एक इंटरव्यू में कहा, 'रोहित शर्मा फिट खिलाड़ी हैं। उनकी फिटनेस अच्छी है। वह थोड़ा भारी दिखते जरूर हैं, लेकिन वह हमेशा यो-यो टेस्ट पास करते हैं। वह विराट कोहली की तरह फिट हैं। ऐसा लगता है कि वह भारी हैं, लेकिन हमने उन्हें मैदान पर देखा है। उनकी चपलता और गतिशीलता अद्भुत है। वह सबसे फिट क्रिकेटरों में से एक हैं।

कोच ने की कोहली की तारीफ

कोहली के बारे में बात करते हुए कलियार ने यह स्वीकार किया कि इस सुपरस्टार बल्लेबाज के आने के बाद से ही टीम की फिटनेस कल्चर में बदलाव आया है। उन्होंने कहा, 'जब फिटनेस की बात आती है तो विराट इसका प्रमुख उदाहरण हैं। उन्होंने टीम में फिटनेस की जागरुकता लाई है। जब आपका शीर्ष खिलाड़ी इतना फिट होता है, तो आप दूसरों के लिए एक उदाहरण बन जाते हैं। वह दूसरों में आत्मविश्वास पैदा करते हैं। जब वह कप्तान थे तो उन्होंने सुनिश्चित किया कि हर कोई फिट रहे। टीम में फिटनेस उनका शीर्ष पैरामीटर था। उन्होंने टीम में वह संस्कृति और अनुशासन पैदा किया है। जो माहौल विराट भाई ने बनाया और यह सराहनीय है। यही कारण है कि सभी भारतीय खिलाड़ी इतने फिट हैं।

भारतीय कोच ने यह भी खुलासा किया कि शुभमन गिल विराट कोहली को न केवल बल्लेबाज के दृष्टिकोण से बल्कि फिटनेस के दृष्टिकोण से भी एक प्रेरणा के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा, 'शुभमन भी काफी फिट हैं। सिर्फ फिट ही नहीं, वह बहुत ही कुशल खिलाड़ी हैं। इसमें कोई शक नहीं कि शुभमन विराट भाई से प्रेरित हैं। चाहे बल्लेबाजी हो, फिटनेस हो या कौशल, शुभमन विराट भाई को फॉलो कर रहे हैं। मुझे यकीन है कि शुभमन आने वाले वर्षों में देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करेंगे।

यो-यो टेस्ट का भारतीय क्रिकेट में काफी महत्व

भारतीय क्रिकेट में यो-यो टेस्ट पिछले कई वर्षों से चर्चा का विषय बना रहा है। कोरोना से पहले तक टीम इंडिया में चयन के लिए इस टेस्ट को पास करना जरूरी था। कोरोना के समय इसमें ढील दी गई। यो-यो टेस्ट के कारण ही भारतीय खिलाड़ियों की फिटनेस में काफी सुधार देखने को मिला है। आईपीएल के 15वें सीजन से ठीक पहले हार्दिक पंड्या और पृथ्वी शॉ सहित कई भारतीय खिलाड़ियों का यो-यो टेस्ट हुआ था। हार्दिक तो टेस्ट में पास हो गए, लेकिन पृथ्वी फेल हो गए। 



इससे पहले भी कई खिलाड़ी यो-यो टेस्ट में फेल हो चुके हैं। इनमें युवराज सिंह, सुरेश रैना, अंबाती रायुडू, मोहम्मद शमी, संजू सैमसन और वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। अब तो आईपीएल खेलने के लिए भी यो-यो टेस्ट को जरूरी कर दिया गया है। यानी जो खिलाड़ी बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में हैं, उन्हें यो-यो टेस्ट पास करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह आईपीएल नहीं खेल सकेंगे। चूंकि पृथ्वी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में नहीं थे, इस वजह से आईपीएल 2022 में खेले थे।

What is Yo-Yo Test in Cricket? - DailyExcelsior
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यो-यो टेस्ट क्या है और भारतीय क्रिकेट टीम में कब शुरू किया गया था?
  • यो-यो टेस्ट बीप टेस्ट जैसा होता है। यह एक रनिंग टेस्ट होता है जिसमें दो सेटों के बीच दौड़ लगानी होती है। 
  • दो सेटों के बीच की दूरी 20 मीटर होती है। यह करीब-करीब क्रिकेट पिच की लंबाई के बराबर है। 
  • इस दौरान खिलाड़ियों को एक सेट से दूसरे सेट तक दौड़ना होता है और फिर दूसरे सेट से पहले सेट तक आना होता है। 
  • एक बार इस दूरी को तय करने पर एक शटल पूरा होता है।
  • टेस्ट की शुरुआत पांचवें लेवल से होती है। यह 23वें लेवल तक चलता रहता है।
  • हर एक शटल के बाद दौड़ने का समय कम होते रहता है, लेकिन दूरी में कमी नहीं होती है।
  • भारतीय खिलाड़ियों के यो-यो टेस्ट में 23 में से 16.5 स्कोर लाना होता है।
  • यो-यो टेस्ट का आविष्कार डेनमार्क के फुटबॉल फिजियोलॉजिस्ट डॉ जेन्स बैंग्सबो ने 1990 के दशक में किया था। 
  • इसे इंटरमिटेंट रिकवरी टेस्ट (यो-यो टेस्ट) कहा जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य खेलों ने यो-यो टेस्ट को अपनाना शुरू कर दिया।
  • भारतीय क्रिकेट टीम में यह टेस्ट 2017 में जुड़ा था। तब स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच शंकर बसु ने इस टेस्ट को भारतीय टीम पर लागू किया था।
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