नेटवेस्ट ट्रॉफी 2002 में टीम इंडिया की शानदार जीत को कौन भूल सकता है। भारतीय टीम के लिए वह भले ही विश्व कप की जीत नहीं थी, लेकिन फिर भी प्रशंसकों के दिलों में इसकी एक विशेष जगह है। इसकी वजह यह है कि भारत ने आखिरकार किसी फाइनल में जीत हासिल की थी और हारने का सिलसिला तोड़ दिया था। नेटवेस्ट से पहले भारत आईसीसी टूर्नामेंट या फिर त्रिकोणीय सीरीज के 17 फाइनल हार चुका था। नेटवेस्ट के फाइनल में इंग्लैंड ने 50 ओवरों में पांच विकेट पर 325 रन बनाए, तो ऐसा लग रहा था कि भारत एक और मैच हार जाएगा, क्योंकि तब मेन इन ब्लू को लक्ष्य का पीछा करने के मामले में अच्छा नहीं माना जाता था।
हालांकि, कप्तान सौरव गांगुली ने जीत दिलाने की जिम्मेदारी अपनी कंधों पर ली। वीरेंद्र सहवाग के साथ ओपनिंग करते हुए उन्होंने 15 ओवरों में 106 रन बनाए। इससे भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें बढ़ गईं थीं। हालांकि, जल्द ही भारत का स्कोर पांच विकेट पर 146 रन हो गया था। गांगुली, सहवाग, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और दिनेश मोंगिया के विकेट जल्दी-जल्दी गिर गए। इसके बाद मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह ने मिलकर छठे विकेट के लिए लंबी साझेदारी की। युवराज अर्धशतक बनाने के बाद आउट हो गए, लेकिन कैफ ने मोर्चा संभाले रखा और पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ अच्छी साझेदारी कर भारत को शानदार जीत दिलाई।
नेटवेस्ट ट्रॉफी के दौरान युवराज सिंह
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बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने उस दिन को फिर से याद किया है जब टीम इंडिया ने लॉर्ड्स के मैदान पर यह ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। तब वह भारतीय टीम के मैनेजर के रूप में ड्रेसिंग रूम में मौजूद थे। जब लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया की हालत खराब थी तो गांगुली काफी भावुक हो गए थे क्योंकि उन्हें लग रहा था कि टीम इंडिया एक और फाइनल हार जाएगी। राजीव शुक्ला ने कहा- जब हम नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल में काफी विकेट गंवा चुके थे तो गांगुली निराश थे। उन्होंने मुझसे कहा कि पता नहीं लीग मैचों में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद मैं फाइनल क्यों हार जाता हूं।
राजीव शुक्ला ने बताया कि जैसे ही उन्हें अहसास हुआ कि भारत लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है, तभी उन्होंने गांगुली से मैदान पर एक खिलाड़ी भेजने के लिए कहा ताकि बल्लेबाजों को मैच को गहराई तक ले जाने और जोखिम मुक्त क्रिकेट खेलते हुए स्ट्राइक रोटेट करते रहने के लिए कहा जा सके। अंत में जब कैफ और जहीर खान जीत की दहलीज पर पहुंचे, तो गांगुली ने सभी को अपनी टी-शर्ट उतारने और उसे लहराने के लिए कहा। दरअसल, कुछ समय पहले भारत दौरे पर इंग्लैंड के कप्तान एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने कुछ महीने पहले मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में ऐसा ही किया था। गांगुली नेटवेस्ट ट्रॉफी जीतने के बाद इंग्लैंड को जवाब देना चाहते थे।
नेटवेस्ट फाइनल
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हालांकि, राजीव शुक्ला ने यह भी बताया कि सचिन तेंदुलकर को इस पर आपत्ति थी और उन्होंने शुक्ला से कहा कि खेल भावना के लिए बाकी टीम को ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा- सौरव ने पूरी टीम से अपनी टी-शर्ट उतारने और उसे लहराने के लिए कहा। तब सचिन तेंदुलकर मेरे पास आए और कहा कि हम सभी ऐसा नहीं करते हैं, यह अच्छा नहीं लगता। यह जेंटलमैन्स गेम है। मैंने सहमति व्यक्त की। लेकिन गांगुली ने ऐसा किया।' गांगुली ने अपनी शर्ट निकाली और उसे लहराया। लॉर्ड्स की बालकनी पर ऐसा करना बहादुरी की बात थी, लेकिन वह गांगुली थे जिसने टीम इंडिया को हमेशा निडर होकर खेलना सिखाया।