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कंगारुओं से बड़ी चिंता है सहवाग की नाकामी

Thu, 28 Feb 2013 04:03 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
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इसमे कोई दो राय नहीं कि भारत ने पिछले 10 सालों में जितने भी टेस्ट जीते हैं उनमे वीरेंद्र सहवाग का महत्वपूर्ण रोल रहा है। सहवाग टेस्ट मैचों में पारी की धमाकेदार शुरुआत करते हुए भारत को मजबूत स्थिति में खड़ा कर देते हैं। सहवाग इन दिनों अपने बुरे दौर से गुजर रहे हैं। घरेलू मैदानों पर भी सहवाग का बल्ला खामोश है। वीरू ने घरेलू जमीन पर खेले पिछले दस टेस्ट में 38.5 की औसत से सिर्फ 647 रन बनाए हैं। इसमें एक शतक और तीन पचासे हैं।
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भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पहले टेस्ट में हराकर भले ही सीरीज में 1-0 की बढ़त ले ली हो लेकिन उनकी असली चिंता सहवाग की बतौर ओपनर नाकामी है। इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि टीम मैनेजमेंट दूसरे टेस्ट के लिए बल्लेबाजी क्रम में बदलाव कर सकती है।

सहवाग का लगातार फ्लॉप होना टीम के लिए चिंता का सबब है। अपने रिफ्लेक्शन को सुधारने के लिए उन्होंने चश्मा जरूर लगा लिया है, लेकिन यह उनके स्टाइल से मेल नहीं खाता है। साथ ही पिछले पांच टेस्ट के उनके प्रदर्शन को देखें तो उन्होंने नौ पारियों में 30.44 के औसत से केवल 274 रन बनाए हैं, जिनमें उनका एक शतक भी शामिल है।
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तब उन्होंने नवंबर 2012 में अहमदाबाद टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ पहली पारी में 117 रन बनाए थे। लेकिन इसके बाद वह कोई कारनामा करने में नाकाम रहे। इस मैच से पहले भी वह अपने खराब फार्म में जूझ रहे थे। काफी आलोचनाओं के बाद उन्होंने दो नवंबर 2012 को उत्तर प्रदेश के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले में 107 रन की पारी खेली थी लेकिन तब उन्होंने पांचवें नंबर पर खेला था। ऐसे में अगर सहवाग हैदराबाद टेस्ट में पांचवें नंबर पर आते हैं तो किसी एक को नंबर टू पर भेजना होगा। उस स्थिति में मध्यक्रम से किसी खिलाड़ी को बाहर बैठाना भी मौजूदा टीम से उचित नहीं है।
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