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Saurabh Kumar: क्रिकेट के लिए 10 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर, अब भारतीय टीम का खटखटा रहा है दरवाजा

Fri, 17 Jun 2022 06:02 PM IST
रोहित राज स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सौरभ को सप्ताह में तीन से चार दिन अभ्यास के लिए बड़ौत से दिल्ली की यात्रा करने में परेशानी होती थी। जब टूर्नामेंट होते थे तो यात्रा उसी के अनुसार बढ़ जाती थी। धीरे-धीरे सौरभ ने यूपी की एज-ग्रुप टीमों में जगह बनाना शुरू किया।
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सौरभ कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के स्पिनर सौरभ कुमार की चर्चा फरवरी 2021 में हुई थी। तब उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए नेट गेंदबाज के रूप में चुना गया था। उसके ठीक एक साल बाद उन्हें श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए टीम में चुना गया था। यूपी के बागपत के रहने वाले सौरभ लेग स्पिनर होने के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी योगदान देते हैं। उनकी चर्चा एक बार फिर से हो रही है। रणजी ट्रॉफी में सौरभ ने शानदार प्रदर्शन किया है। सौरभ ने पिछले पांच रणजी मैच में 18 विकेट लिए हैं। उन्होंने सेमीफाइनल में मुंबई के खिलाफ दूसरी पारी में तीन विकेट लिए, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। हम यहां आपको सौरभ कुमार की कहानी बता रहे हैं...
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सौरभ जब 10 वर्ष के थे तब उन्होंने दिल्ली में अपने क्रिकेट के सपनों को पूरा करने के लिए बागपत के बड़ौत स्थित अपने घर को छोड़ दिया था। उन्हें ट्रेनिंग के लिए 60 किलोमीटर की दूरी ट्रेन से तय करने पड़ती थी। शुरू में उनके पिता रमेश चंद उन्हें छोड़ देते थे। बाद में सौरभ खुद ही आने-जाने लगे। सौरभ के पिता ऑल इंडिया रेडियो के आकाशवाणी भवन में एक जूनियर इंजीनियर थे।

सौरभ को ओएनजीसी में मिली थी छात्रवृत्ति
सौरभ को सप्ताह में तीन से चार दिन अभ्यास के लिए बड़ौत से दिल्ली की यात्रा करने में परेशानी होती थी। जब टूर्नामेंट होते थे तो यात्रा उसी के अनुसार बढ़ जाती थी। धीरे-धीरे सौरभ ने यूपी की एज-ग्रुप टीमों में जगह बनाना शुरू किया। अंडर-13 और अंडर-15 टीमों के माध्यम से अपना रास्ता बनाते हुए उन्होंने 15 साल की उम्र में ओएनजीसी में एक क्रिकेट छात्रवृत्ति भी हासिल कर ली। उन्हें बिशन सिंह बेदी से सीखने का मौका मिला।
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सौरभ कुमार - फोटो : amar ujala
वायु सेना ने सौरभ को सर्विसेज की टीम का रास्ता दिखाया
अंडर-16 और अंडर-17  के बाद सौरभ अंडर-19 टीम में भी शामिल हो गए, लेकिन सीनियर टीम का रास्ता कठिन था। उस समय यूपी की टीम में पीयूष चावला, अली मुर्तजा, प्रवीण गुप्ता और अविनाश यादव जैसे स्पिनर थे। कुलदीप यादव और सौरभ कश्यप भी लाइन में थे। इसी बीच, भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया। यूपी के लिए खेलने की तत्काल कोई संभावना नहीं होने के कारण 20 वर्षीय सौरभ ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उन्हें एयरमैन की नौकरी भी मिल गई।

इस तरह यूपी की टीम में हुए थे शामिल
सर्विसेज की टीम में शामिल होने के बाद सौरभ की नजर भारतीय टेस्ट टीम पर थी। उन्होंने 2014-15 में डेब्यू सीजन में सात मैचों में 36 विकेट हासिल किए। इसी बीच, यूपी में स्पिनरों की कमी हो गई। मुर्तजा और चावला का प्रदर्शन निराशाजनक था। वहीं, कुलदीप टीम इंडिया में शामिल हो गए थे। राज्य के चयनकर्ताओं ने सौरभ से बात की। उनके परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था। सर्विसेज की टीम में उनके पास स्थायी नौकरी भी थी। सीनियर टीम में खेलने का भी मौका मिला था। 

यूपी के लिए पहले मैच में 10 विकेट झटके
राज्य के चयनकर्ताओं के साथ बातचीत से शुरू हुई यूपी लौटने की संभावना सौरभ या उनके परिवार के लिए आसान फैसला नहीं था। सर्विसेज में, उन्हें एक स्थिर सरकारी नौकरी की सुरक्षा के साथ-साथ सीनियर टीम के लिए नियमित रूप से खेलने का अवसर भी मिला। यूपी के चयनकर्ताओं ने उन्हें अंडर-23 में शामिल किया गया। उन्होंने टीम के लिए 21 विकेट लिए। इसके बाद उन्हें सीनियर टीम में शामिल कर लिया गया। उन्होंने अपने घरेलू टीम के लिए पहले प्रथम श्रेणी मैच में गुजरात के खिलाफ 10 विकेट लिए।
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सौरभ कुमार - फोटो : social media
लॉकडाउन में हो गए थे परेशान
लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के कारण उन्हें ईरानी ट्रॉफी के लिए सौराष्ट्र के खिलाफ शेष भारत की टीम में चुना गया था, लेकिन कोरोनावायरस के कारण यह मैच नहीं हुआ था। सौरभ ने उस समय को अपने जीवन का सबसे कठिन समय बताया। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, "मैं असाधारण रूप से अच्छी गेंदबाजी कर रहा था और मुझे लगता है कि मैं राष्ट्रीय टीम के लिए चयन से दूर नहीं था। शेष भारत में मेरे चयन ने भी यही साबित किया, लेकिन कोविड के कारण सबकुछ रुक गया। मैं अक्सर घर पर बैठकर सोचता था कि चीजें कब फिर से शुरू होंगी। लॉकडाउन के दौरान मेरे मन में काफी नकारात्मक विचार आ रहे थे।''

सौरभ के प्रथम श्रेणी करियर की बात करें तो उन्होंने 49 मैचों में 210 विकेट चटकाए। इस दौरान उन्होंने 16 बार पारी में पांच विकेट और छह बार मैच में 10 विकेट लिए हैं। उनका श्रेष्ठ प्रदर्शन एक मैच में 65 रन देकर 14 विकेट रहा है। इसके अलावा उन्होंने बल्लेबाजी में भी अहम योगदान दिया है। सौरभ ने 1657 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने दो शतक और आठ अर्धशतक लगाए। 

सौरभ ने कहा, "मेरे लिए सबसे अच्छी बात यह थी कि चयनकर्ताओं ने क्रिकेट फिर से शुरू होने पर मेरे प्रदर्शन को याद किया। मुझे 2021 में इंग्लैंड के दौरे पर एक नेट गेंदबाज के रूप में टीम में शामिल होने के लिए कहा गया था। तभी मुझे विश्वास हुआ कि अगर आप बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं तो सही अवसर जरूर आता है।'' सौरभ को दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए भारत-ए की टीम में चुना गया था। उसके बाद उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में नेट बॉलर के रूप में रखा गया और फिर श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में मुख्य टीम में शामिल किया गया।
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